अंतरिक्ष स्पेस या आसमान काला क्यो है जबकि अरबों सितारे मौजूद है

हम अपनी पृथ्वी को हरा भरा देख सकते है क्योकि यहाँ रोशनी है और रोशनी का सबसे बड़ा स्त्रोत है सूरज से आने वाला प्रकाश। सूरज एक तारा है, क्या आप जानते है हमारे ब्रह्माण्ड (universe) मे अरबों तारे मौजूद है लेकिन फिर भी हमारा अंतरिक्ष काला दिखलाई पड़ता है। सभी तारे अपनी रोशनी छोड़ते है, लेकिन फिर भी हमारा स्पेस काला क्यो है। पृथ्वी को सूरज अपनी रोशनी देता है। पृथ्वी गोल घूमती है और सूरज के चारो और चक्कर लगाती है। पृथ्वी का जो भाग सूरज के सामने रहता है वहाँ दिन रहता है। और जो भाग सूरज के सामने नहीं रहता वहाँ रात हो जाती है। पृथ्वी के वायुमंडल मे मौजूद कण और अणु से सूरज की रोशनी  टकराकर विभिन्न रंगो मे बिखर जाती है और नीले रंग का बिखराव सबसे अधिक होता है और हमे आसमान नीला दिखाई देता है लेकिन अंतरिक्ष मे कोई वायुमंडल मौजूद नहीं है और ना ही रोशनी मौजूद है जिसके कारण अंतरिक्ष काले रंग के अंधकार से भरा पड़ा है।

 

सितारे बड़े समूहों में पाए जाते हैं जिन्हें आकाशगंगा कहा जाता है। एक आकाशगंगा में लाखों या अरबों तारे हो सकते हैं। हमारे पास सबसे बड़ी आकाशगंगा हैं एंड्रोमेडा (Andromeda)। अब सवाल ये उठता है की अरबों सितारे होने के बावजूद इन सितारो की रोशनी मिलकर अंतरिक्ष को रोशन क्यो नहीं कर देती। तो दोस्तो आज हम आपको बतायेंगे की अरबों सितारे होने के बावजूद अंतरिक्ष काला क्यो है।

 

अरबों सितारे होने के बावजूद अंतरिक्ष काला क्यो है why space is black in hindi

 

डॉप्लर प्रभाव के कारण doppler effect in hindi

 

इसके एक तर्क यह दिया जाता है की डॉप्लर प्रभाव (Doppler effect) के कारण अंतरिक्ष काला दिखाई पड़ता है। इसके अनुसार जब प्रकाश का स्त्रोत आपसे दूर जाता रहता है तो उसकी वेव लेंथ लंबी हो जाती है  जैसा की हम जानते है  कि जैसे जैसे प्रकाश कि वेवलेंथ लंबी होती जाती है प्रकाश का दिखना भी कम होता जाता है। इस सिधान्त के अनुसार  ब्रह्मांड का विस्तार हो रहा है और तारे भी दूर जाते जा रहे है इसलिये तारो से आने वाली रोशनी भी दूर जाती जा रही है। इसे हम एक और उदाहरण के माध्यम से समझ सकते है जब कोई आवाज आपके निकट आती जाती है तो आवाज ज्यादा सुनाई देती है ऐसा ध्वनि तरंगों की आवृत्ति (frequency) बढ़ जाने के कारण होता है। जिससे आवाज कि पिच (pitch) हाई हो जाती है लेकिन जैसे जैसे ये आवाज आपसे दूर जाती रहती है तो आपको आवाज सुनना भी कम होता जाता है (क्योकि आवाज कि आवृत्ति (frequency) और पिच (pitch) कम हो जाने के कारण )।।

 

तारो का दूर होना

 

प्रकाश सीधी रेखा मे और स्थिर गति से ट्रैवल करता है, ये किसी वस्तु से टकराता है और फिर बिखराव होता है जिसके कारण हम सभी रंगो को देख पाते है। ब्रह्मांड मे मौजूद आकाशगंगाये और तारे हमसे काफी दूरी पर स्थित है। सूर्य पृथ्वी के सबसे नजदीक का तारा है जिसकी रोशनी पृथ्वी तक पहुँचने मे 8.3 मिनट लगाती है। इसका मतलब है कि जो रोशनी आप देख रहे है वो 8.3 मिनट पुरानी है। कई आकाशगंगाये और तारे ऐसे है जो हजारो, मिलियन और ट्रिलियन प्रकाश वर्ष पुराने है। इसका मतलब ये है कि आप जो आसमान मे तारे देख रहे है उनकी रोशनी इतने समय पुरानी निकली हुई है।

एक दूसरे सिद्धांत के अनुसार ऐसा माना जाता है कि ब्रह्मांड कि उत्पत्ति अनंत (infinite) नहीं है, ये करीब 15 बिलीयन साल पुराना है। इसका मतलब ये है कि हम केवल वस्तुओ को उतने ही दूर तक देख सकते है जितनी प्रकाश कि दूरी 15 बिलीयन वर्षो मे सफर कर सके। इसलिये तारो से आने वाली रोशनी इतनी दूर है कि हम तक पहुँचने के लिये उतना समय नहीं है।  इसलिये अंतरिक्ष काला है। अंतरिक्ष के बारे मे ज्यादा जानकारी के लिये क्लिक करे

 

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