जानिए अजीत डोभाल के बारे मे रोचक जानकारी Ajit Doval Biography in hindi

किसी भी देश की सुरक्षा का दायित्व उस देश की सेना और उस देश की सरकार का होता है और इन्ही के बीच सरकार एक ऐसे व्यक्ति को नियुक्त करती है जिसे देश के अंदर और देश के बाहर युद्ध स्तर का काफी अच्छा अनुभव हो, जिसे देश की रक्षा के सारे पहलू मालूम हो. ऐसे व्यक्ति को सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के रूप में नियुक्त करती है।  यह राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद् का मुख्य कार्यकारी और प्रधानमंत्री का राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के प्राथमिक सलाहकार के रूप में कार्य करता है. तत्काल समय में हमारे देश के पांचवे राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल/Ajit Doval  है।  आइये जानते है उनके बारे में…

 

अजीत डोभाल की प्रारंभिक शिक्षा – Early life of Ajit Doval in hindi

अजीत डोभाल का जन्म 20 जनवरी 1945 को गढ़वाल, उतराखंड में हुआ था. उनकी स्कूली शिक्षा अजमेर के मिलिट्री स्कूल में हुई स्कूल पूरा होने के बाद उन्होंने आगरा विश्वविद्यालय में प्रवेश लिया और वही से ही अर्थशास्त्र में स्नातकोत्तर किया. 1968 में अजीत डोभाल कड़ी मेहनत से आइपीएस के लिए चुने गए और उन्हें पहली नियुक्ति केरला कैडट में मिली और वही से उनके कैरियर की शुरुआत हो गई.

 

करियर – Ajit Doval Career

73 साल की उम्र और 50 साल से ज्यादा देश की सेवा का अनुभव, आप अंदाज़ा लगा सकते है कि अजीत की जिन्दगी में कैसे कैसे मोड़ और कैसी- कैसी परिस्थितिया आई होंगी. हम आपको उनके कुछ ऑपरेशन या उनके कैरियर के बारे में संक्षिप्त में बता रहे है जिसके बाद ही उनके देश के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के रूप में चुना गया.

  • 1968 में आइपीएस बनने के 4 साल बाद वह आईबी से जुड़ गए और उनके जीवन में एक नया दौर शुरू हुआ. कह सकते है कि इसके बाद उन्हें एक भारतीय जासूस के रूप में देखा जाने लगा.

 

  • 1980 में मिजोरम में उग्रवाद फैलाना शुरू हुआ और उन्होंने मिज़ो नेशनल फ्रंट को अपनी और कर लिया जिससे मिरोरम में शांति फिर से स्थापित हो पाई.

 

  • 1984 में Ajit Doval ने ऑपरेशन ब्लू स्टार में एक अहम् भूमिका निभाई. खालीस्थान की मांग करने वालो ने जब स्वर्ण मंदिर पर अपना कब्जा कर लिया तो वह एक रिक्शा चालक बन कर उन लोगो के बीच शामिल हो गए और उनकी सारी सूचनाये पुलिस को देते रहे. उनकी मदद से वह ऑपरेशन सफल रहा.

 

  • 1999 में कंधार में आतंकवादियों ने भारतीय हवाई जहाज को हाई जैक कर लिया था. तब अजीत डोभाल को यह जिम्मेदारी दी गई कि वह सारे यात्रियों को वहाँ से सुरक्षित निकाले. और अजीत ने ये जिम्मेदारी बखूबी निभाई और सारे यात्रियों को बचा लिया गया.

 

  • Ajit Doval ने भारत की खुफिया एजेंसी रॉ में कई साल तक काम किया और सात साल तक पाकिस्तान में रहे, पर किसी को उन पर शक तक नही हुआ और अजीत वहाँ से कई महवपूर्ण जानकारियां भारत को देते रहे.

 

  • वह पंजाब और कश्मीर के शांति के लिए चलये गए कई ऑपरेशन में जासूस बने रहे. कहा यह भी जाता है अजीत देश के लिए 33 साल तक गुमनामी में रहे है.

 

  • 50 साल के लम्बे कैरियर में उन्होंने केवल 7 साल ही पुलिस की वर्दी पहनी.

 

  • अपनी सेवाओ के अंतिम सालो में वह आईबी के लिए काम करते थे और प्रमोशन होते होते वह आईबी के निदेशक बन गए और 2005 में वह आईबी के निदेशक पद से सेवानिवृत्त (रिटायर) हो गए.

 

  • 2005 में Ajit Doval पद से सेवानिवृत्त तो हो गए लेकिन देश प्रेम और देश सेवा से जुड़े रहे. और उसके बाद देश के कई बड़ी रिपोर्ट्स तैयार करने में भी अपना योगदान दिया.

 

  • 2014 उनकी जिन्दगी में एक नया मोड़ लेकर आया और मोदी सरकार ने उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के रूप में चुना और उनका कैरियर जो लग रहा था की खत्म होने पर है एक बार फिर से सक्रिय हो गया.

 

  • 2014 में इराक में फसी 46 भारतीय नर्सो की रिहाई में उनका बहुत बडा योगदान माना जाता है और ऐसा भी कहते है कि वह स्वयं इराक गए थे और वहां पर एक गुप्त मिशन को अंजाम दिया.

 

  • Ajit Doval ने भारत और पाकिस्तान की सुरक्षा नीति को बदलने में भी एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है.

 

  • 2016 में पाकिस्तान में हुई सर्जिकल स्ट्राइक में भी में योजना बनाने में उनका पूरा योगदान रहा.

 

  • इसके बाद 2018 में Ajit Doval को स्टेटिजिकल पॉलिसी का अध्यक्ष बनाया गया और पुलवामा में हुए आतंकी हमने का जवाब देने और एयर स्ट्राइक भी अजीत की योजनाओ पर पुरे किये गए.

 

मैडल

अजीत डोभाल को अपने लम्बे सरकारी कैरियर पुलिस के कई मैडल मिले और पुलिस सेवा में दिया जाने वाला सबसे बड़ा सम्मान कीर्ति चक्र भी मिल चुका है।  कीर्ति चक्र पाने वाले अजीत डोभाल पहले देश सेवक है.

दोस्तों, अजीत डोभाल ने अपनी जिंदगी में कई तरह की लड़ाईयां लड़ी हालाकि वह युद्ध नही था पर।  वह परिस्थितियां युद्ध से कम भी नही थी. अपनी जान पर खेल कर दुसरे देश की खुफिया जानकारी निकालना हो या फिर आतंकियों से हाई जैक प्लान के सारे यात्रियों को बचाना हो अजीत ने अपनी जिम्मेदारी को बखूबी निभाया है।  इस देश को ऐसे सेवक की जरूरत है, हमे और अजीत डोभाल की जरूरत है.

 

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One Response

  1. Punit Nagar March 16, 2019

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