क्यो बंद होने के कगार पर है जेट एयरवेज

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देश की दूसरी सबसे बड़ी एयरलाइन्स पर संकट के बादल घिर आये है।  खबरों की माने तो jet airways  के मालिक नरेश गोयल इस एयरवेज को बचाने के लिए अपनी आखिरी कोशिशे करते नज़र आ रहे है और देश के सामने एक नया सवाल खड़ा हो रहा है कि क्या किंगफिशर की तरह यह भी बंद हो जाएगी? क्या विजय माल्या की तरह नरेश गोयल भी देश का पैसा लेकर तो नही भाग जाएँगे?

तो चलिए बात शुरू करते है 1992 से जब देश में jet airways  की शुरुआत  हुई थी. उस समय उदारीकरण का दौर आया था है।  देश में विदेशी कम्पनियों ने निवेश करना शुरू कर दिया था और उसी समय नरेश गोयल जो की एक कारोबारी हुआ करते थे, जेट एयरवेज का गठन किया. और अगले साल से यानि 1993 में jet airways ने उड़ान भरना शुरू कर दिया. साल 1995 तक जेट पूरी तरह से एक एयरलाइन्स कम्पनी बन गई और 2010 आते-आते देश में सबसे बड़ी एयरलाइन्स कम्पनी के रूप में काम करने लगी.

 

2008 में जब विश्व आर्थिक मंदी के दौर से गुजर रहा था तब विश्व की बड़ी बड़ी एयरलाइन्स को नुकसान पहुंचा जिसकी चपेट में जेट भी आ गया और उसकी मुसीबत वही से शुरू हो गई. इसी के चलते साल 2011-12 में जेट एयरवेज को 1 हजार 236 करोड़ का नुकसान उठाना पड़ा. जबकि कम्पनी पर उस समय भी 13 हजार करोड़ का कर्ज बाकि था।  इसके बाद 2012 मे सरकार ने देशी विमान सेवाओ में 49% विदेशी निवेश की इजाज़त दे दी जिसे एफडीआई (FDI) कहा गया.

 

 

अब तक किंगफ़िशर एयरलाइन्स बर्बादी के कगार पर खड़ी थी और नरेश गोयल को भी लग गया था कि  जल्दी कुछ न किया गया तो उनका भी यही हाल होगा. तो नरेश गोयल ने सरकार की इस FDI नीति का फायदा उठाया और अबुदाबी की एयरलाइन्स एतिहात एयरलाइन्स को 24% हिस्सेदारी बेच दी. नरेश गोयल को लगता था की अब उनकी कंपनी संकट के दौर से निकल जाएगी. कम्पनी की हालत इतनी खराब थी कि वह कर्मचारियों को वेतन नही दे  पा रही थी. और विदेशी निवेश के बाद भी कुछ खासा फर्क नही पड़ा यानि 24% हिस्सेदारी बेचने के बाद भी कुछ हाथ नही लगा. हालाकि जानकार इसकी दो बड़ी वजह बताते है.

 

पहला तो हवाई जहाज का महंगा होता तेल और दूसरा जेट एयरवेज का खर्च ज्यादा होना. एक रिपोर्ट के मुताबिक जेट एयरवेज का प्रति किलोमीटर खर्च 3 रुपयें 17 पैसे है जबकि स्पाइसजेट का खर्च 2 रुपयें 53 पैसे और इंडिगो का 2 रूपये 4 पैसे है. जेट एयरवेज का  खर्च ज्यादा होने से कम्पनी पर दबाव भी ज्यादा होता चला गया.

 

jet airways सितम्बर 2018 तक 13 हजार करोड़ घाटे में थी और कंपनी पर इस समय 8 हजार करोड़ का कर्ज भी है।  कंपनी को मार्च,2019 तक 3 हजार 120 करोड़ रूपये का लोन चुकाना है और मार्च 2021 तक 6 हज़ार करोड़ का कर्ज देना है. लेकिन कंपनी की हालत से अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि यह कर्ज देना बहुत ही मुस्किल है।  कंपनी के पास इस वक्त 120 विमान है लेकिन ज़्यादातर खड़े है।  एक रिपोर्ट के मुताबिक, जेट एयरवेज की उड़ान चलती रहने के लिए कम्पनी को 3 हज़ार 105 करोड़ रुपयें की जरूरत है लेकिन कंपनी की हालत और किंगफिशर के अनुभव को देखते हुए बैंको ने लोन देने से मना कर दिया है.

और इसी बीच कम्पनी का शेयर एक साल में 70% से ज्यादा गिर गया है।  जनवरी 2018 में जो शेयर 821 रूपये था वो जनवरी 2019 में 253 पर आ गया है और एक अनुमान के मुताबिक यह शेयर 150 तक होने की सम्भावना जताई जा रही है.

 

 

हालाकि कम्पनी को बचाने के लिए नरेश गोयल पूरी तरह से कोशिश  कर रहे है।  एक खबर के मुताबिक उन्होंने टाटा ग्रुप से निवेश के लिए बात की पर काम नही बना. इकोनोमिक टाइम्स के मुताबिक  एक बार फिर से एतिहात एयरलाइन्स से नरेश गोयल ने बात की लेकिन  एतिहात एयरलाइन्स ने उनके सामने कड़ी शर्ते रख दी. और यदि नरेश गोयल  एतिहात एयरलाइन्स की शर्ते मान लेते है तो जेट एयरवेज पर एतिहात एयरलाइन्स का पूरा कब्ज़ा हो जाएगा .

बैको ने जेट के शेयरहोल्डर से कहा की जब तक वह पुराना कर्जा नही देते तब तक और कर्जा नही मिलेगा  और  एतिहात एयरलाइन्स ने भी कंपनी को बचाने के लिए कई शर्ते रख दी. हालाकि जेट एयरवेज ने छटनी की और कई फ्लाइट्स भी कम कर दी और अपने विमानों को जमीन पर खड़ा कर दिया लेकिन इससे संकट कम होता नही दिखाई दे रहा है.

 

अब यह आने वाला समय ही बताएगा की क्या jet airways आसमान पर उड़ाने भरती नज़र आएगी या नहीं।

 

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