क्यों नहीं होती ब्रह्मा की पूजा why brahma is not worshiped in hindi

पुराणों के अनुसार भगवान एक है लेकिन उनके स्वरुप तीन है जिन्हें त्रिमूर्ति के नाम से जाना जाता है.  त्रिमूर्ति यानी ब्रह्मा विष्णु और महेश.  ब्रह्मा सृष्टि के रचयिता है तो विष्णु जगत के पालनहार. कहते है यह तीनो वास्तव में एक ही शक्ति है बस इनके नाम अलग अलग है. इनके भक्त इनकी अलग अलग रूपों में पूजा करते है लेकिन एक बात सबको हैरान करती है की भगवान विष्णु और शिव की पूजा तो बड़े भक्ति भाव से की जाती है लेकिन सृष्टि के रचयिता होने के बावजूद भी ब्रह्मा/brahma की पूजा और आराधना क्यों नहीं की जाती? क्यों पुष्कर को छोड़कर ब्रह्मा के मंदिर नहीं है? क्या इसके पीछे भी कोई रहस्य है? जी हाँ दोस्तों इसके पीछे भी कई पौराणिक कथाएं है जिसके बारे में आज हम इस आर्टिकल में बताएँगे. तो आइये जानते है

 

क्यों नहीं होती ब्रह्मा की पूजा – why brahma is not worshiped in hindi

 

भगवान शिव का अभिशाप – curse of shiva to brahma

 

why brahma is not worshipped in hindi

 

शिव पुराण के अनुसार एक बार ब्रह्मा और विष्णु में विवाद हो गया की दोनों में से कौन श्रेष्ठ है. देखते ही देखते यह विवाद बढ़ गया जिसे शांत करने के लिए भगवान शिव को बीच में हस्तक्षेप करना पड़ा। भगवान शिव एक विशाल योतिस्तंभ के रूप में प्रकट हुए जो अग्नि का बना था. यह लिंग अनंत था जिसका न कोई आदि था और न ही अंत. योतिस्तंभ  के रूप में शिव ने ब्रह्मा और विष्णु को कहा कि अगर उनमें से कोई भी इस लिंगम के किसी भी छोर तक पहुंच जाएगा, वो ही असल में श्रेष्ठ है. ब्रह्मा और विष्णु दोनों ने सहमति व्यक्त की और इसके अंत की खोज के लिए लिंग के अलग अलग दिशा में चले गए.  सालो तक दोनों खोज करते गए और  उन्हें एहसास हुआ कि लिंग का कोई अंत नहीं है। भगवान विष्णु ने इस बात को स्वीकार किया  और भगवान शिव से कहा की यह वास्तव में अनंत है.  लेकिन ब्रह्मा/ brahma ने शिव से चालाकी करने की कोशिश की । उन्होंने केतकी के फूल को यह बोलने के लिए कहा  कि वह योतिस्तंभ  को बताएं कि ब्रह्मा  लिंग के सबसे ऊपरी छोर तक पहुंच गये हैं. और फूलो ने वैसा ही किया.  ब्रह्मा का झूट देखकर भगवान शिव को क्रोध आ गया और उन्होंने ब्रह्मा को श्राप दे दिया की उनकी कभी भी पूजा नहीं की जाएगी. उन्होंने  केतकी के फूलो को भी श्राप दिया कि इनका किसी भी हिंदू अनुष्ठान में इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। शिव पुराण के अनुसार इसलिए  ब्रह्मा/ brahma की पूजा नहीं की जाती.

 

 

Curse of sawitri to brahma – देवी सावित्री का अभिशाप

 

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एक अन्य पौराणिक कथा के मुताबिक देवी सावित्री  के श्राप के कारण ब्रह्मा/ brahma की संसार में पूजा नहीं की जाती. कथा के अनुसार पुष्कर में भगवान ब्रह्मा ने एक यज्ञ का आयोजित किया जिसमे उनकी पत्नी देवी सावित्री  का उपस्थित होना जरुरी था, किन्तु देवी समय पर न पहुच सकी. यह देखकर ब्रह्मा ने गाय के मुख से देवी गायत्री को प्रकट किया और उनसे विवाह कर लिया और उन्हें यज्ञ में बिठा दिया. जब देवी सावित्री  यज्ञ स्थल पर पहुची तो उन्हें यह सब देखकर क्रोध आ गया और उन्होंने ब्रह्मा को श्राप दे दिया की की उनकी कभी पूजा नहीं की जाएगी हालाकिं देवताओ के आग्रह पर उन्होंने यह कहा की पृथ्वी पर सिर्फ पुष्कर में ही ब्रह्मा पूजनीय होंगे. यही कारण है की आज भी सिर्फ पुष्कर में ब्रह्मा की पूजा की जाती है.

 

 

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