खुद के टाइप किये हुए डॉक्यूमेंट मे गलती क्यों नही पकड़ पाते हम – विज्ञानिक तर्क

इन्सान अकसर गलतियां करता रहता है और कई गलतियां ऐसी होती है जिसे चेक करने पर भी सुधार नही कर पाता जैसे की typing  या कुछ लिखते समय शब्दों में गलतिया करना. दरअसल  जब हम कोई डॉक्यूमेंट टाइप करते है तो उसमे कई गलतिया करते है और जब उसे रीचेक करते है तब भी वो गलतियां पकड़ में नही आती और वो डॉक्यूमेंट गलतियों के साथ ही आगे चला जाता है. हालाकिं हमारे टाइप किये हुए शब्दों को अगर कोई दूसरा व्यक्ति पढता है तो उसमे गलतियां निकलने की बहुत सम्भावनाये होती है और जब कोई दूसरा हमारी गलती निकालता  है तो हमे लगता है इतनी छोटी सी गलती मैंने कैसे कर दी जबकि मैंने तो अपने टाइप किये हुए डॉक्यूमेंट को पढ़ कर रीचेक भी किया था. तो आइये हम बताते है कि आप अपने लिखे में गलतिया क्यों नही निकाल पाते.

 

Why do people repeat certain typing mistakes?

 

जब कोई हमारे पढने लिखने में गलती निकालता  है तो बहुत अजीब सी फीलिंग होती है. लगता है जैसे हमारी अब तक की पूरी पढाई पर सवाल खड़ा हो रहा है हालाकि कोई और मौके पर गलती निकालता  तो चल जाता लेकिन पढने लिखने का सीधा सम्बंध दिमाग से होता है और गलतिया अक्सर दिमाग कम इस्तेमाल करने से होती है लेकिन यहाँ पर हिसाब थोडा उल्टा है. दरअसल जब भी हम typing  में कोई गलती करते है तो वो दिमाग का ज्यादा इस्तेमाल करने के कारण होती है. टाइपिंग करते समय इन्सान के दिमाग में स्पेलिंग पर जोर नही होता बल्कि इस बात पर होता है कि जो बात वो बताना चाहता है. वो बात सही से बता पा रहा है या नही. ऐसा भी कहा जा सकता है कि typing करते समय हम अपने दिमाग में वाक्य बना रहे होते है और उन वाक्यों के लिए सही शब्द ढूंढ रहे होते है जिससे हमारा ध्यान स्पेलिंग पर नही जाता और हम अनजाने में गलत स्पेलिंग टाइप कर देते है.

 

गलती सब से हो जाती है लेकिन अब बात यह रही कि हम खुद के टाइप किये हुए वाक्यों में गलती नही पकड़ पाते जबकि हम उसे रीचेक भी करते है. दरअसल अपने टाइप किये हुए शब्दों  में गलतियाँ न ढूंढ पाना हमारे  पढने के  तरीके पर निर्भर करता है. हमारा दिमाग हमारे लिखे को सुचना के उद्देश्य से पढता है मसलन हमारा सन्देश सही तरीके से लिखा गया है या नही, कही कोई ऐसी बात तो नही लिख दी जिसका कोई और मतलब निकल जाए आदि.

 

इस पर कैंब्रिज यूनिवर्सिटी में एक शोध किया गया. जिसमे एक कागज पर  कई वाक्यों लिखे गए और उन वाक्यों में कई शब्दों को गलत लिखा गया जैसे शब्द के आगे और पीछे के वर्ड वही रहने दिए और बीच के शब्दों को बदल दिया. और दुसरे व्यक्तियों को वह पढने के लिए दिया. पढने वालो ने न सिर्फ गलत स्पेलिंग को सही पढ़ा बल्कि वो संदेश भी उन तक पहुच गया. वैज्ञानिको ने बताया की ऐसा स्ट्रूप इफ़ेक्ट के कारण  हुआ जिसमे उन्होंने  उन शब्दों को बार-बार और कई बार पढ़ रखा था. हम भी कुछ ऐसे शब्द लिख रहे है जिन्हें पढ़ कर आप स्ट्रूप इफ़ेक्ट को समझ सकते है.

 

THE PAOMNNEHLA  POWOR OF THE HUMAN MIND.  According to a research of Cmabrigde univertisy, it deson’t  mttare in waht  the ltteers in a wrod are, the olny ipromoatnt  tihng is that the frist and lsat ltteer be in the rghit pclae.

 

ये इफ़ेक्ट बताता है की हम अक्षरों या शब्दों को नही बल्कि वाक्यों को पढ़ते है जिससे लिखे हुए वाक्यं का सही संदेश हमे मिल सके. स्ट्रूप इफ़ेक्ट आँखों और दिमाग के बीच कनेक्शन न बनने से होता है जैसे हमारी आँखे कुछ गलत शब्द देखती है और दिमाग उसे सही पढता है. पढ़ते वक़्त हम लिखे हुए की तुलना अपने दिमाग में छपे शब्दों से करते है और लिखे हुए शब्दों का ज्यादातर  हिस्सा मिल जाता है और बाकि पर हम ध्यान नही देते और गतली को हो जाती है.

 

typing mistakes in hindi

 

ये स्ट्रूप इफ़ेक्ट और भी कई तरीको से काम करता है जैसे RED कलर से GREEN लिखा हो तो दिमाग को उसे स्वीकारने में थोडा टाइम लग जाता है जब तक हम अक्षरों पर ध्यान नही देते. इसे हम ऊपर दी हुई इमेज से समझ सकते है.

 

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