एक और प्यार की निशानी है बुलंद शहर का ताजमहल Taj Mahal in Bulandshahr

इस महंगाई के ज़माने में जहा प्यार इन्टरनेट और टेक्नोलॉजी में सिमट कर रह गया है वही कुछ लोग ऐसे भी है जो अपने प्यार की खातिर दूसरा ताजमहल बनाने की भी हिम्मत रखते है. किसके लिए?? अपनी बेगम की यादो को बरसो तक जिन्दा रखना के लिए… क्या आप जानते है इंडिया के उत्तर प्रदेश में एक और ताजमहल/ taj mahal है. जी हाँ आपने सही पढ़ा एक और “ताजमहल”/ taj mahal जो फैजल हसन साहब ने अपनी बेगम की याद में बनवाया है. फैज़ल हसन कादरी साहब, बुलंद शहर के केसर कलन गाँव में रहते है और वहा उन्होंने अपनी बेगम जान के लिए हुबहू छोटा ताजमहल/ taj mahal बनवा दिया है.

 

Reason behind Taj Mahal in Bulandshahr in hindi

 

कादरी साहब की कोई संतान नही है और जब उनकी बेगम ने उनसे सवाल किया की हमारे मर जाने के बाद हमे कौन याद करेगा तो कादरी साहब ने जवाब दिया की अगर उनके रहते उनकी बेगम का इंतेकाल हो गया तो वो अपनी बेगम के लिए एक शानदार मकबरा बनवाएँगे जिससे सारी दुनिया उन्हें याद करे. अपनी बेगम के चले जाने के बाद वो कई इंजीनियरो से मिले पर उन्हें कुछ समझ नही आया और अंत में उन्होंने ताजमहल जैसा मकबरा बनाने की सोची.

taj mahal in bulandshahar

 

ताजमहल/ taj mahal जैसे दिखने वाले इस मकबरे को बनने में 2 साल लग गए और कादरी साहब के सारे पैसे भी इस पर खर्च हो गए. इसी मकबरे में उनकी बेगम जान की कब्र भी है

 

वैसे तो ये मकबरा काफी मजबूत है लेकिन फिनिशिंग का काम होना बाकी है जिसके लिए कई सारे संगठन सामने आये जो इसे पूरा करवाना चाहते थे लेकिन कादरी साहब की खुद्दारी  ने उनसे कोई भी मदद लेने से इंकार कर दिया.  इस मकबरे को बनवाने के लिए उनकी सारा धन दौलत भी खत्म हो गया जिनमे उनकी खानदानी जमीने भी शामिल है .

 

आगरा का ताजमहल/ taj mahal दुनियां के सात अजूबो में से एक है जिससे बनने में लगभग 20 साल लग गए जिसे कई हज़ार मजदूरों ने बनाया. और जो प्यार की एक निशानी माना जाता है

वही दूसरी तरफ बुलंद शहर का ये ताजमहल ऑनलाइन प्यार के ज़माने में महोब्बत की एक बहुत बड़ी मिसाल है जिसे दुनिया के कई देशो ने तवाजो दी है और बहुत दूर दूर से लोग इसे देखने आते है.

 

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