बुद्धिमानी की कहानी story of wisdom in hindi

कहा जाता है की बुद्धिमान होना धन होने से ज्यादा बड़ी दौलत है. क्योकि ये बुद्धिमानी ही है जो इंसान को फर्श से अर्श तक पहुचाती है, उसे दौलतमंद बना देती है, एक बुद्धिमान व्यक्ति अपने जीवन में कुछ भी कर सकता है, अपने जीवन में आने वाली चुनौतियों का सामना वह बहुत ही चतुर तरीके से करता है. इस लेख में हम जो कहानी आपको बताने जा रहे है वह भी एक एक बुद्धिमान संत की कहानी है.

 

संत की बुद्धिमानी

wisdom of saint story in hindi

कंदगुप्त एक प्रसिद्ध संत था, वह मणिनगर में रहता था जो की मणिपुर साम्राज्य की राजधानी थी, वहाँ ऐसे बहुत कम लोग थे जो कंदगुप्त की बुद्धिमानी के बारे में नहीं जानते थे. वह अपनी भविष्यवाणी के लिए भी जाना जाता था.

मणिपुरी साम्राज्य का राजा मणिराज था, जब मणिराज को कंदगुप्त के कारनामो का पता चला तो वह इस महान संत का सम्मान करना चाहता था, इसलिए उसने कंदगुप्त को अपने महल में बुलाया.

जब कंदगुप्त महल पहुँचा तो मणिराज ने उनका स्वागत किया और उन्हें बैठने के लिए सीट प्रदान की गयी, उसके बाद राजा ने संत को बोला की वह अपने होरोस्कोप से उसका भविष्य बताये. राजा के होरोस्कोप को अच्छी तरह देखने के बाद संत उसका भविष्य बताने लगा. जब उसने राजा के जीवन में घटने वाली अच्छी बातो को बताना शुरू किया तो राजा इससे प्रसन्न हो गया और उसे इनाम स्वरूप सोना और चांदी देने लगा, जब वह राजा के बारे में अच्छी बात बताता तो राजा उसे इनाम देता.

अब बारी आई राजा के जीवन में घटने वाली बूरी चीजो की,  जब कंदगुप्त ने राजा के जीवन में घटने वाले दुर्भाग्यो के बारे में बताना शुरू किया तो इससे राजा का दृष्टिकोण बदलने लगा और एक समय ऐसा आ गया जब वह कंदगुप्त पर चिल्लाया और उससे कहा की रुको तुम गन्दी आत्मा हो, तुम्हारी इतनी हिम्मत कैसे हुई मेरे बारे में ऐसी बकवास करने की. मै तुम्हे आदेश देता हूँ की बताओ मुझे की तुम्हारी मृत्यु का समय क्या है.

कंदगुप्त ने छोटे स्वर में उत्तर देते हुए कहा मेरे प्रभु! मेरी गणना के अनुसार, मेरी मौत तुम्हारी मृत्यु से एक घंटे पहले होगी.   यह बात सुन राजा स्तब्ध रह गया, उसे अपनी गलती का एहसास हुआ, उसने संत से माफी मांगी और उसे बहुत सारा धन देकर भेजा.

इस प्रकार ये कहानी हमें बताती है की बुद्धिमानी का स्थान धन से बहुत ऊँचा होता है. जरूरत पढने पर बुद्धिमानी धन से ज्यादा काम आती है. कंदगुप्त ने तब बुद्धिमानी का परिचय दिया जब राजा बहुत क्रोधित था. उसकी बुद्धिमानी ने उसे धन भी दिलाया और राजा के क्रोध से भी बचाया.

 

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