सिकंदर और पोरस के बीच युद्ध – हाइडस्पेश की लड़ाई

इतिहास में भारत को कई आक्रमणों का सामना करना पड़ा है और इन्ही आक्रमणों में से एक है यूनानी आक्रमण. इस आक्रमण का नेता था सिकंदर. सिकंदर को भारत में कई राजाओ का सामना करना पड़ा लेकिन जिस युद्ध को इतिहास में सबसे ज्यादा महत्व दिया गया है वह है Battle of the Hydaspes/ हाइडस्पेश की लड़ाई यानी झेलम नदी के तट पर सिकंदर और सिन्ध-पंजाब के एक बहुत बड़े भू-भाग के राजा पोरस के बीच युद्ध. हालाकिं इस युद्ध के नतीजो को लेकर अलग अलग मान्यताएं है लेकिन इतिहासकारों का इसको लेकर अपना मत है.

 

sikander and porus history in hindi – Battle of the Hydaspes in hindi

 

सिकंदर और पोरस की लड़ाई

 

सिकंदर और पोरस के बीच युद्ध  – हाइडस्पेश की लड़ाई

 

सिकंदर मेसेडोनिया का शासक था जो अपने पिता फिलिप की मृत्यु के बाद 20 वर्ष की उम्र में यूनान का शासक बना. सिकन्दर विश्व विजेता के स्वप्न से प्रेरित था. शासक बनने के बाद उसने एशिया माइनर, भूमध्य सागरीय प्रदेशो, फिनिशया और मिस्त्र पर अधिकार करते हुए ईरान के साम्राज्य को भी नष्ट कर दिया. इसके बाद भारत विजय के लिए भी उसकी महत्वाकांक्षा ने जन्म लिया. चूँकि उस समय भारत में राजनितिक अर्थव्यवस्था फैली हुई थी इस कारण sikander  के आक्रमण के लिए भारत की स्थिति उपयुक्त थी.

भारत के क्षेत्र अनेक ऐसे राजाओ और कबायली गणराज्यो में विभाजित थे जो अपने अपने क्षेत्रो पर अधिकार पाने के लिए एक दुसरे से संघर्ष कर रहे थे. ऐसी स्थिति देखते हुए 326 ईसा पूर्व में अलेक्जेंडर खैबर रास्ते से भारतीय सीमा पर पंहुचा.  लेकिन सिकन्दर के लिए भारत विजय का अभियान उतना आसन नहीं रहा. सीमावर्ती क्षेत्रो में स्थित कई छोटे छोटे गणतंत्रो ने सिकन्दर की सेना को टक्कर दी जिसमे अश्वक और अष्टक शासक प्रमुख थे. लेकिन अपनी युद्ध निति और कई तरह के छल बल के सहारे सिकन्दर आगे बड़ा.

लेकिन  सिकन्दर  की असली परेशानी शुरू हुई  राजा पुरू के राज्य को जितने में.  पोरस का राज्य पंजाब में झेलम नदी (हाइडस्पेश) से लेकर चेनाब नदी (एसीसेंस) तक फैला हुआ था. पोरस पोरवा राजवंश के वशंज थे जो  एक वीर और स्वाभिमानी योद्धा थे. राजा पोरस ने सिकंदर के विजयो से बिना डरे और प्रभावित हुए झेलम नदी के तट पर उसका रास्ता रोक  दिया जहाँ उसका सामना यवन सेना से हुआ जिसे यूनानी इतिहास में हाइडस्पेश की लड़ाई के नाम से जाना जाता है. इस लड़ाई में सिकंदर की सेना को जमकर टक्कर मिली और उन्हें भारी क्षति उठानी पड़ी.  पोरस ने समकालीन राज्यों से गठबंधन बनाने का प्रयास भी किया लेकिन वह असफल रहा. इतिहासकारों के अनुसार अंत में सिकंदर के सामने पोरस को हार का सामना करना पड़ा. पोरस के साहस से सिकंदर बहुत प्रभावित हुए, और न केवल उन्हें उन्ही  का राज्य वापस कर दिया बल्कि पोरस को  दक्षिण-पूर्व तक के क्षेत्रों का अधिकार भी दे दिया

 

लेकिन इस युद्ध के बारे में कई इतिहासकारों के अलग अलग मत भी है. कई विद्वानों का मानना है की चुकीं हाइडस्पेश की लड़ाई की एकमात्र जानकारी यूनानी स्रोतों में है इसलिए इस युद्ध में सिकंदर  को विजयी दिखाया गया. असल में इस युद्ध में पोरस की जीत हुई थी.  इस मत को साबित करने के लिए कई इतिहासकारों ने ईरानी और चीनी विवरणों को अपना आधार बताया.

जानिये पोरस कौन था और उसके बहादुरी के किस्से

 

दोस्तों उम्मीद करते है आपको यह पोस्ट पसंद आया होगा. अगर आप भी इस मुद्दे पर अपनी राय या सुझाव देना चाहते है तो कृपया कमेंट करें. साथ ही हमारे आने वाले सभी articles को सीधे अपने मेल में पाने के लिए हमें free subscribe करें.

 

यह भी जाने 

जानिए कैसे लिखा जाता है इतिहास और क्या है इसके अध्यन के स्रोत

मुहम्मद बिन तुगलक दिल्ली सल्तनत का मुर्ख राजा क्यों था

मानव तस्करी के आकडे और तथ्य Human trafficking facts in india

बरमूडा ट्राएंगल क्या है इतिहास और रोचक घटनाये

Leave a Reply