बोझ से कम नहीं है नफरत की दुर्गन्ध story on hatred in hindi

एक शिक्षक ने अपनी कक्षा के बच्चो के साथ एक खेल खेलने का फैसला किया। शिक्षक ने कक्षा के प्रत्येक बच्चे को कहा कि वे सभी कल अपने साथ कुछ आलू प्लास्टिक के थैले में लेकर लाए. साथ ही हर आलू पर उस इंसान का नाम लिख ले जिससे आप सबसे ज्यादा नफ़रत करते हो. हर बच्चा अपनी प्लास्टिक की थैली में उतने ही आलू रखे जितने लोगो से वे नफरत करता है या जिनसे वह नाराज़ है.

जब अगले दिन कक्षा की शुरुआत हुई , तब हर बच्चा अपने साथ कुछ आलू लेकर आया जिनपर कुछ नाम लिखे हुए थे जिनसे वह गुस्सा थे। कुछ बच्चो की थैली में 2 आलू, कुछ में 3 जबकि कुछ अपने साथ 5 – 6 आलू भी लेकर आये। यह देखकर शिक्षक ने सभी बच्चों से कहा की वे सब आलू की थैली को अपने साथ 2 हफ्ते तक रखे और जहाँ जहाँ जाये उसे साथ लेकर जाये । दिन बीतना शुरू हो गये और कुछ बच्चो ने शिकायत करना शुरू कर दिया की आलू  में से बदबू आ रही है.  2 सप्ताह के बाद, बच्चों को राहत मिली क्योंकि गेम अब समाप्त हो चूका था.

शिक्षक ने पूछा: “2 सप्ताह तक अपने साथ आलू रखकर आप सभी को कैसा महसूस हुआ?”  बच्चों ने एक एक करके अपनी परेशानियाँ और शिकायते सुनाना शुरू कर दिया की कैसे कुछ समय तक अपने साथ  बदबू वाले आलू साथ रखने में परेशानी हुई.

 

तब शिक्षक ने उन्हें खेल के पीछे छिपी बात का मतलब समझाया.  शिक्षक ने कहा: ” यह कहने को तो एक गेम था लेकिन वास्तव में  यह वो स्थिति है जब आप अपने दिल के अंदर किसी के लिए नफरत या गुस्सा छुपा कर रखते हैं. नफरत की बदबू आपके दिल को दूषित कर देती है और आप जहां भी जाते हैं वहां आप इसे अपने साथ ले लेकर जाते है. अगर आप सिर्फ 2 हफ्तों के लिए सड़े  हुए आलू की गंध बर्दाश्त नहीं कर पाए , तो फिर कैसे अपने अन्दर की नफरत की बदबू के साथ आप  ख़ुशी ख़ुशी जी सकते है. जब तक नफरत, गुस्से या नाराज़गी की बदबू आपके अन्दर है तब तक आप दोस्ती और प्यार की सुगंध कैसे महसूस कर सकते है.  असल में इस बदबू से आप मन ही मन घुटते रहते है और अपनी जिन्दगी को ही दुःख और नकारात्मकता से भर देते है.

 

अपने दिल से इस गुस्से की भावना को निकाल दे  ताकि आप जीवन भर के लिए इस बोझ को अपने साथ न लेकर चले. अगर किसी से गलती होती है तो उसे एक मौका दे. किसी दुसरे को माफ़ कर देने से बड़ा महान काम कोई नहीं है.

 

बच्चे तो  बात को अच्छे से समझ गये और आप??????

 

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