प्यार में दिल और दिमाग का क्या रोल है ???

“नामुमकिन है इसको समझना, क्योकि दिल का भी अपना एक दिमाग होता है”  याद नही ये शेर किस व्यक्ति ने कहा है लेकिन खूब कहा है “दिल का  भी अपना एक दिमाग होता है’ इस शेर से एक सवाल मन में आता है कि प्यार दिल से होता है या दिमाग से और इन दोनों का प्यार से क्या कनेक्शन है ???   यह सवाल अगर हम खुद से पूछे की हम अपने अलग अलग अनुभव के आधार पर इसका जवाब देंगे. कोई कहेगा दिल से होता है, कोई कहेगा दिमाग से होता है तो कोई कहेगा किस्मत से होता है. लेकिन मनोविज्ञान का कहना है कि प्यार दिमाग से होता है और प्यार में दिल को भी नज़रंदाज़ नही किया जा सकता. तो कैसे?? आइये जानते है.

 

psychology of love in hindi – प्यार और दिल का मनोविज्ञान 

प्यार में दिल और दिमाग का रोल

 

न्यूयॉर्क की सिराक्यूज यूनिवर्सिटी में मनोविज्ञानिको द्वारा कि गई एक रिसर्च के अनुसार प्यार 0.2 सेकंड में हो सकता है.  जब हम किसी को देखते है और वो हमे अच्छा लगने लगता है तो हमारे दिमाग में 12 तरह के हार्मोन्स का रिसाव बढ़ जाता है तब हम उस इन्सान को पसंद करने लगते है. शायद इसे ही हम पहली नज़र का प्यार कहते है. इस रिसर्च में यह भी बताया गया है कि प्यार हमारे व्यक्तित्व को और हमारे मूड को बदल देता है. जब व्यक्ति प्यार में होता है तो उसके दिमाग में ऑक्सीटोसिन, वैसोप्रेसिन,  डोपेमाइन, और एड्रेनलिन जैसे कई हार्मोन्स बढ़ने लगते है जिससे व्यक्ति खुश रहता है और एक अलग तरह कि उर्जा अपने अन्दर महसूस करता है. जो उसकी बुरी आदते छुड़ाने में या फिर दुसरो कि ख़ुशी के लिए काम करने को प्रेरित करती है.

 

अब बात आती है  प्यार को दिल से क्यों जोड़ा जाता है या प्यार कि नीव दिल को ही क्यों माना जाता है. असल में जब व्यक्ति प्यार में होता है तो दिमाग में केमिकल लोचा हो जाता है यानी हार्मोन्स अपने व्यवहार से अलग दिखने लगते है जिसका असर हमारे शरीर पर साफ़ देखा जा सकता है जैसे पार्टनर के सामने आते ही बातें भूल जाना, दिल कि धड़कन तेज होना, हॉट सुख जाना, हथेलियों पर पसीना आना,  आदि यानि मोटे तौर पर कह सकते है कि ये सब प्यार में होने के लक्षण है. अगर ये सब आपके साथ भी होता है तो मुबारक हो आप किसी के प्यार में है…

 

इसके अलावा प्यार में अलग अलग तरह कि इच्छाएं जन्म लेती है और ये सब भी दिमाग में हार्मोन्स के रिसाव के कारण होता है. जैसे ऑक्सीटोसिन एक दुसरे कि परवाह करना बताता है वैसोप्रेसिन एक दुसरे के साथ रहने कि इच्छा को जन्म देता है, डोपेमाइन हार्मोन्स बार बार मिलने को इच्छुक बनता है आदि.

 

अब आपको पता लग गया होगा कि प्यार दिमाग में केमिकल लोचा होने के कारण यानी दिमाग में हार्मोन्स के रिसाव के कारण होता है और दिल इस बात कि पुष्टि करता है कि “हाँ, मुझे इस व्यक्ति से प्यार है”

 

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