मुहम्मद बिन तुगलक दिल्ली सल्तनत का मुर्ख राजा क्यों था

मुहम्मद बिन तुगलक दिल्ली सल्तनत का ऐसा शासक जो अपनी नीतियों के कारण जाना जाता है, ज्यादा पढ़ा लिखा और जानकार होने के बावजूद भी इसकी अधिकतर नीतिया असफल हो गयी. जबकि अकबर अनपढ़ होते हुए भी कई महत्वपूर्ण सफल नीतिया लाने में कामयाब हुआ. कुछ साम्राज्यवादी इतिहासकारों ने तो मुहम्मद बिन तुगलक को पागल सुल्तान तक कह दिया. लेकिन इसके पीछे क्या वजह थी, ये तो हम तभी जान पायेंगे जब हम उसकी उन नीतियों के बारे में जानेंगे जो असफल हो गयी.

 

मुहम्मद बिन तुगलक की असफल नीतिया

मुहम्मद बिन तुगलक ने अपनी राजधानी को बदल दिया. वह अपनी राजधानी दिल्ली से दौलताबाद  ले गया. उस समय के विद्वान यह भी सिद्ध करने की कोशिश करते है की वह दिल्ली की सारी जनता को ही दौलताबाद ले गया था. यह माना जाता है की मंगोलों के आक्रमण से दिल्ली को खतरा हो गया था और इसी कारण वह अपनी राजधानी को दिल्ली से महाराष्ट्र के देवगिरी जिसे दौलताबाद भी कहा जाता है  ले जाने का फैसला किया.  इस स्थानान्तरण से बहुत से लोग रास्ते में या तो बीमार पढ़ गये या तो मर गये. जो लोग दौलताबाद पहुचे वह अपने निर्वासन को सहन नहीं कर पाये और मृत्यु को प्राप्त हो गये. बाद में सुल्तान ने अपने निर्णय की मुर्खता को समझा और लोगो को दिल्ली वापिस लौटने का आदेश दिया, इसका परिणाम यह हुआ की जो लोग दिल्ली से दौलताबाद की यात्रा में बच गए थे वे वापिसी की यात्रा करते वक्त मर गये. कुल मिलाकर सुल्तान का यह निर्णय बूरी तरह असफल हो गया.

 

Muhammad bin tughluq history in hindi

मुहम्मद बिन तुगलक का दूसरा कदम था सांकेतिक मुद्रा का प्रारंभ, उस समय केवल सोने की मुद्रा चला करती थी. उसने तांबे या कांसे की सांकेतिक मुद्रा चलायी. उसकी यह योजना असफल हो गयी क्योकि जन साधारण ने इस सांकेतिक मुद्रा में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाiई. इसके अलावा लोग इस मुद्रा की नक़ल करने लगे. कई लोगो ने अपने घर में टकसाल खोल लिये, जिससे बाजार में सिक्को की भरमार हो गयी और वस्तुओ की कीमते बढ़ गयी. जब सुल्तान को इस बात का पता चला तो उसे अपनी इस नीति को वापस लेना पड़ा. उसने लोगो से कहा की वे धातु के ये सिक्के वापस कर दे और इसके बदले उन्हें चांदी और सोने के सिक्के मिलेंगे. इससे उसका खजाना खाली होने लगा.

अपनी वित्तीय स्थिति को कमजोर होते देख उसने दोआब के किसानो पर कर का भार बढ़ा दिया. दोआब का क्षेत्र गंगा और यमुना के बीच का स्थान है. इसी समय दोआब में अनावृष्टि और अकाल भी पढ़ रहा था, इससे किसानो की स्थिति दयनीय हो गयी.

मुहम्मद बिन तुगलक का खुरासान अभियान असफल हो गया, उसने इस अभियान के लिये बहुत बड़ी सेना खड़ी की. सेना को अस्त्र और शस्त्र प्रदान किये गये, उन्हें एक साल तक वेतन दिया गया.इसकी बाद यह सेना भंग कर दी गयी.

मुहम्मद बिन तुगलक का कराचील अभियान जो की  एक सैनिक भूल के कारण असफल हो गया. खुसरो मल्लिक जो इस अभियान का सेना नायक था शत्रु क्षेत्र में बहुत अन्दर तक घुस गया.यह निर्णय सुल्तान की अनुमति के बिना लिया गया था. इसका बहुत भयंकर परिणाम हुआ, यह माना जाता है की 10 हजार की सेना में से केवल दस लोग ही वापस लौट कर आये.

इस प्रकार मुहम्मद बिन तुगलक की ज्यादातर योजनाये असफल हो गयी. उसकी इन नीतियों से जनता असंतुष्ट हो गयी. उसकी योजनाये हालाँकि प्रगतिशील थी लेकिन उनमे व्यावहारिक ज्ञान की कमी थी. इन नीतियों को सही तरह से लागू नहीं किया गया. जिसका हरजाना जनता और सैनिको को भुगतना पड़ा. इसी कारण एक मुहावरा भी प्रसिद्ध हो गया जिसे आज हम तुगलकी फरमान कहते है.

 

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  1. vikas July 9, 2018

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