बकरा शादी और बुजुर्ग की चतुराई – moral story in hindi

आज कल के ज्यादातर युवाओ में एक गलत सोच पनप रही है और वो ये है की अपने बड़े बुजुर्गो के तजुर्बे को नज़र अंदाज़ करना.  दुसरे शब्दों के कहे तो अपने माता पिता या दादा दादी के अनुभवों से कोई सीख न लेना. युवाओ में ये बहुत बड़ी कमी है की वो अपने से बड़ो की बात पर सोच विचार नही करते और कोई न कोई तर्क दे कर उनकी बात काट देते है जिसका खामियाजा उन्हें आगे चल कर भुगतना पड़ता है.  हम आपको एक कहानी के माध्यम से समझाने की कोशिश करते है की बड़े बुजुर्गो की जिंदगी के अनुभव हमारे लिए कितने जरुरी है… इस कहानी का शीर्षक है बुजुर्ग की चतुराई.

 

बुजुर्ग की चतुराई – moral story in hindi 

 

एक लड़का और एक लड़की आपस में एक दुसरे से बहुत प्यार करते है और दोनों की शादी तय होती है. लड़की वाले थोड़े ज्यादा धनवान होते है और इस शादी के खिलाफ होते है. शादी से पहले लड़के के सामने एक शर्त रखी जाती है की बारात के साथ कोई बुजुर्ग नही आयेगा.

लड़के वाले शर्त को मान तो लेते है पर सोचते है की ऐसी शर्त क्यों रखी गई है. उन्हें कुछ समझ नही आता और शादी का दिन आता है और लड़के वाले एक बुजुर्ग आदमी को ड्रम में बंद कर के बारात के साथ ले जाते है. बारात मंडप तक पहुचती है तभी लड़की वाले एक और शर्त रख देते है की सभी बारातियों को शाखाहरी खाने में एक एक बकरा खाना पड़ेगा नही तो ये शादी नही हो सकती.

अब एक व्यक्ति अकेला एक बकरे का गोश्त यानि 8 से 10 किलो कैसे खा सकता है. सारे बारातियों में हडकंप मच गया की 8 से 10 किलो मीट नही खा सकते और फिर आखिर कर उस ड्रम में बंद बुजुर्ग आदमी से इस समस्या का उपाए पूछा गया.

तो उस बुजुर्ग आदमी ने सुझाव दिया की एक एक बकरा कटेगा फिर बनेगा और फिर सभी बारातियों को दिया जाये यानि अगर 100 बाराती है तो 100 बकरे पकाए जाएगे लेकिन एक बकरा पकेगा और सभी बारातियों में बटेगा और फिर दूसरा बकरा बनेगा और फिर सभी बारातियों के बाटा जाए ऐसे करते हुए 100 बकरे भी कट जाएगे और सभी बाराती एक एक बकरा खा भी लेंगे…

1 बकरा पका कर सभी बारातियों में बाटा जाएगा तो बहुत ही छोटा छोटा हिस्सा सभी बारातियों के पास आयेगा और जब तक दूसरा बकरा पकाया जाएगा तब तक पहले वाला हजम हो चूका होगा….साथ ही एक घंटे में 2-3 से ज्यादा बकरे बन भी नहीं सकते थे. लड़की वालो को यह चतुराई बहुत पसंद आई और उन्होंने अपनी शर्त वापस ले ली.

 

इसे कहते है बुजुर्गो का तजुर्बा…अब उन दोनों युवाओ की शादी भी हो गई और उनके अब २ बच्चे भी है…

 

शिक्षा – चतुराई को अनुभव के द्वारा जीता जा सकता है और अनुभव हमे समय, माता पिता और गुरु द्वारा ही मिलता है.

 

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