कही “क्लब 99” आपकी खुशियों पर ग्रहण तो नही.

खुशियाँ इन्सान की इच्छाओ और जरुरतो पर निर्भर करती है. कुछ लोगो के पास जो कुछ है उसमे वो खुश हो जाते है और कुछ लोग थोड़े और की चाह में अपनी खुशियों को दाव पर लगा देते है.  ऐसी ही एक कहानी आज हम आपसे इस पोस्ट में शेयर करेंगे और बताएँगे कि क्या है क्लब 99…

कही “क्लब 99” आपकी खुशियों पर ग्रहण तो नही.Story of happy life in hindi

एक बार एक राजा अपने मंत्री के साथ राज्य का निरिक्षण करने निकला. वो दोनों घूमते हुए अपने राज्य के एक गावं में पहुंचे. वहाँ उन्होंने एक परिवार को देखा जिसमे पति-पत्नी और दो बच्चे थे. वह बड़ा ही खुश और हँसता खेलता परिवार था. राजा भी उन्हें देख कर बहुत खुश था लेकिन उसके समझ नही आ रहा था कि वह इस राज्य का राजा है, इतना धनवान है लेकिन खुश नही है और ये परिवार निर्धन है और इनके पास कोई सुख सुविधा भी नही है फिर भी ये परिवार खुश कैसे है?

 

 

राजा ने अपने मंत्री से यही सवाल किया कि वह सभी सुख सुविधा का मालिक है लेकिन खुश नही है और ये परिवार जिसके पास कुछ भी नही है फिर भी इतना खुश कैसे है. मंत्री ने जवाब दिया राजा जी ये परिवार अभी क्लब 99 का हिस्सा नही है इसलिए इतना खुश है.

राजा ने मंत्री से पूंछा के क्लब 99 क्या है तो मंत्री के कहा ये मैं आपको बता नही सकता लेकिन समझा जरुर सकता हूँ जिसके लिए एक सप्ताह का समय और 99 सोने की मोहरे लगेंगी. राजा ने मंत्री को 99 सोने की मोहरे दी जो मंत्री ने रात को उस परिवार के घर के बाहर  रख दी.
सुबह जब वो व्यक्ति उठा तो देखा की  उसके घर के बाहर सोने की मोहरे रखी है. उसने वो मोहरे उठाई और घर के अंदर ले आया. जब उसने मोहरों को गिना तो जाना कि वो 99 थी. उसने बार बार गिना और अपनी पत्नी से भी गिनने को कहा तो वो 99 ही थी. उसे लगा कि एक मोहर वहा कही घर के आसपास गिर गई होगी उसने सारी जगह ढूंढा पर मोहर नही मिली और मिलती भी कैसे वो थी ही 99.

 

 

अगले दिन आदमी के दिमाग में वही सोने की एक मोहर घूम रही थी उसे वो कुछ भी कर के पूरी 100 मोहरे करना चाहता था. तभी उसने निर्णय लिया कि वह कड़ी मेहनत करेगा और बची हुई एक मोहर को कमा कर लायेगा.

वह अपने घर से कही दूर किसी अच्छे काम की तालाश में जाता है जिससे की उसे अच्छे पैसे मिल सके. थक हार कर जब वो शाम को घर लौटता है तो देखता है कि दो सोने की मोहरे कम हो गई. उसने दुबारा गिना  अब वो 99 से कम हो कर 97 रह गई थी. उसने अपनी पत्नी से पूंछा तो पत्नी ने बताया कि उन दो मोहरों से उन्होंने पुरे परिवार के लिए कपड़े खरीद लिए है. पति को बहुत गुस्सा आया और घर में झगडा शुरू हो गया. पति पूरा दिन मेहनत कर के एक मोहर कमाना चाहता था और पत्नी ने दो मोहरे और खर्च कर दी.

अगले दिन पति फिर काम पर निकल गया और घर आकर देखता है एक मोहर और कम हो गई. अब बच्चो ने खिलौने खरीद लिए थे. अब घर में आये दिन झगडे शुरू हो गए.

एक सप्ताह बाद राजा और मंत्री फिर से उस परिवार के घर के पास गए और देखा अब वो हँसी और खुशी गायब थी. राजा ने मंत्री से पूंछा ये कैसे हुआ तो मंत्री ने बताया ये वो एक सोने की मोहर कमाने के चक्कर में हुआ है.

इन्सान के पास जो कुछ है उसे उसमे संतुष्टि नही है और ये बहुत से दुखो का कारण है. इस कहानी का मर्म भी यही है इन्सान के पास जो है उसे उसमे संतुष्ट रहना चाहिए न की लालच में आकर अपनी खुशियों को ग्रहण लगाना चाहिए. अगर आप भी इसी तरह के किसी क्लब 99 का हिस्सा है तो हछोडिये एक मोहर को और उस 99 मोहरों का मज़ा लीजिये जो आपके पास है. आपकी खुशियों को कभी ग्रहण नही लगेगा.

 

दोस्तों आपको यह कहानी कैसी लगी हमें कमेंट्स बॉक्स के जरिये जरुर बताये. साथ ही इस कहानी को जरुर शेयर करें और हमसे जुड़े रहने के लिए हमें फ्री सब्सक्राइब करे और फेसबुक पर हमारा पेज like करें.

 

यह भी जाने 

बोझ से कम नहीं है नफरत की दुर्गन्ध story on hatred in hindi

Motivational story of Stephen hawking in hindi स्टीफन हॉकिंग की प्रेरणादायक कहानी

रिटायर्ड शिक्षक और बीमा एजेंट की कहानी Best Moral story in hindi

मन से जुड़े होते है मन के तार.. राजा और लकड़हारे की कहानी

Leave a Reply