मन को काबू करना है तो पहले करें खुद से दोस्ती!! कैसे? यहाँ जाने

कहते है इंसान का सबसे बड़ा दोस्त और दुश्मन वो खुद होता है. अगर इंसान खुद से दोस्ती कर ले तो जीवन की हर कठिनाई का सामना हँसते हँसते किया जा सकता है वही इंसान खुद का दुश्मन हो तो उसे बर्बाद होने से कोई नहीं बचा सकता. खुद से दोस्ती करने के लिए अपनी भावनाओ, विचारो, कमजोरियों, मजबूतियों और मनोस्थिति को समझना जरुरी है. सीधे शब्दों में कहें तो खुद को समझना बहुत जरुरी है. तभी हम अपने मन को या अपने आपको एक सही दिशा दे सकते है. इसे हम एक कहानी के माध्यम से बताने की कोशिश करते है.

 

बेकाबू घोडा, लगाम और दोस्ती

 

एक राजा के पास चार घोड़े थे, बहुत ही शैतान और अड़ियल जो किसी के काबू में नही आते थे. एक दिन राजा ने ऐलान कर दिया की जो मेरे घोड़ो को काबू में कर लेगा उसे इनाम दिया जाएगा…

जिन्होंने इनाम की लालच में ये जिम्मेदारी ली उन्हें घोड़ो ने अपनी पीठ से गिरा कर घायल कर दिया.  अब उन घोड़ो की जिम्मेदारी कोई लेने लो तैयार नही था लेकिन एक शख्स ने घोड़ो की जिम्मेदारी ली और साथ ही राजा के सामने दो शर्त भी रख दी. पहली ये की मैं इन घोड़ो को अपने साथ ले जाऊंगा और दूसरी ये की जब तक ये घोड़े काबू में नही आ जाते तब तक मेरे काम के बारे में मुझसे कुछ न पूछा जाए. राजा को ये शर्त मंजूर करनी पड़ी. उसके पास और कोई चारा भी नही था…

सालो गुजर गए न घोड़ो का कुछ पता चला और न उस शख्स का. राजा ने तो उम्मीद ही छोड़ दी थी की वो घोड़े अब वापिस भी आएंगे फिर एक दिन वो शख्स उन घोड़ो के साथ वापिस आया और वो भी कमियाबी के साथ…

अब राजा ने पूछा की ये काम तुमने कैसे किया तो उस शख्स ने बताया की पहले मैंने घोड़ो के साथ दोस्ती की, और उन्हें खुला छोड़ दिया फिर जब वो खाते तो मैं भी उनके साथ खाता, जब वो सोते तो मैं भी उनके साथ सोता, जब वो भागते तो मैं भी उनके  साथ भागता. इससे उनको लगा की मैं भी एक घोडा ही हूँ और वो मुझे अपना दोस्त समझने लगे और फिर धीरे धीरे मैंने उनपर सीट रखी और बेल्ट लगाई. शुरू में उन्हें ये अच्छा नही लगा पर और उन्होंने सीट और बेल्ट दोनों निकल कर फैक दी लेकिन फिर उनको इसकी आदत हो गई और अब ये सब आपके सामने है….और मेंरी दोस्ती की वजह से मैं उन्हें ट्रेन कर पाया…जबकि बाकि के सब ट्रेनर ने गलती ये की वो बस उन्हें काबू करना चाहते थे बिना उनसे दोस्ती करे.

 

ठीक इसी तरह हर इन्सान के पास चार घोड़े है मनस, असंतुष्टि, चिंता और अहंकार. अगर हमे खुद से दोस्ती करनी है तो इन चारो को दोस्त बनाना होगा. यह चार वह चीजे है जो इंसान के मन को भ्रमित करती है जिससे हमारा मन बेकाबू हो जाता है और दिशा भटक जाता है. यहाँ दोस्ती का मतलब है इन्हें समझना और समझकर इन पर काबू पाना.  ध्यान रहे की इन को खत्म नही करना है क्योकि बिना इन चारो के तो इंसान की कल्पना ही नहीं की जा सकती.  सिर्फ इन पर कुछ हद तक लगाम लगानी है.  कई लोग इनसे दोस्ती करने के लिए योगा या मैडिटेशन का सहारा भी लेते है तो कई आत्मचिंतन का …

 

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