क्या आप जानते है समोसा, जलेबी, आचार जैसे शब्द हिंदी भाषा के नही है….

दुनिया में ऐसी कोई भी भाषा नही है जो एक ही देश की हो यानी की हर भाषा में दूसरी भाषा या दुसरे देश के गुण साफ तोर पर देखे जा सकते है. लेकिन फिर भी भाषा विज्ञानिको ने संस्कृत को सबसे समृद्ध भाषा माना है. हम जिस हिंदी का उपयोग करते है वो संस्कृत से ही बनी है. इस बात में कोई शक नही लेकिन क्या आप जानते है हम जिस समोसा, आचार, जलेबी आदि जैसे खान-पान के शब्दों का प्रयोग करते है वो हिंदी के शब्द नही है और न ही संस्कृत के है. तो वो किस भारतीय भाषा के है? हम आपको बता दे की ये शब्द किसी भारतीय भाषा के नहीं है. तो आईये जानते है ये कौन से शब्द है और कहा से आये.

 

नही है  समोसा, जलेबी, आचार जैसे शब्द हिंदी भाषा के….

 

जलेबी

जलेबी शब्द

 

इसे उत्तर भारत की देसी मिठाई कहा जाता है लेकिन आपको जान कर यह हेरानी होगी की यह शब्द अरबी का है जिसे अरबी भाषा में जलेबिया कहते है और वहा भी ये शब्द उतना पॉपुलर है जितना की भारत में है.

 

 

समोसा

 

समोसा शब्द

 

भारतीय स्नैक्स की दुनिया में शायद ही कोई स्नैक्स समोसे से ज्यादा पॉपुलर हो. और ऐसा भी कहा जाता है कि चाय समोसे के बिना अधूरी है लेकिन क्या आप जानते है समोसा हिंदी का शब्द नही है. यह पर्शियन शब्द है. भारत में समोसा मध्य एशिया से आया जिसे आज ईरान कहा जाता है. वहां पर इसे सम्बुसक कहते है.  मध्य एशिया ले लोग इसे सोम्सा कहते है और अफ्रीकियो ने इसे सम्बुसा नाम दिया है.

 

 

आचार

 

आचार शब्द

 

जरा सोचिये जिसे खाने का स्वाद बढ़ाने के लिए खाया जाता है वो कहाँ से आया?. अनजाने में हम अपने घर में रोजाना पर्शियन शब्द का इस्तेमाल करते है. आचार का अर्थ होता है नमक, सिरके और शहद में मिक्स की गई सब्जी या फल..

 

 

गुलाब जामुन

 

गुलाब जामुन शब्द

 

आपने कभी सोचा ही नही होगा की यह शब्द भारत में नही बना असल में यह एक पर्शियन शब्द है जिसमे गुल का अर्थ है फुल और जामुन का अर्थ है पानी. और इसी पानी के फूल को हम गुलाब जामुन कहते है.

 

अनानास

 

अनानास शब्द

 

इंग्लिश में पाइनएप्पल  कहा जाने वाले फल का कोई हिंदी नाम नही है. असल में यह एक साउथ अमेरिका का एक शब्द है जिसे भारत में भी अपना लिया गया है. साऊथ अमेरिका के देशो में इसे आज भी अनानास ही कहा जाता है

 

चाय

 

चाय शब्द

 

यह एक ऐसा शब्द है जो रोज आपके कानो में पड़ता होगा. और शायद इससे सुनते ही समझ जाते होंगे की ये शब्द चीन का है यानी चीन की भाषा का है. चीन की मैंडरीन और कैंटनीज भाषा में इसे चा कहते हैं जिसका मतलब है चाय की पत्ती.

 

यह सभी शब्द अलग अलग भाषा के है और भारत में भी प्रचलित हो गए इसका मतलब है की हिंदी भाषी लोगो  ने इन शब्दों को अपना लिया और इसलिए ये शब्द भी हिंदी के ही कहे जाने लगे.

 

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