भारत के पांच अद्भुत और चमत्कारिक स्थान

दोस्तों भारत मे कई ऐसे स्थान है जो बहुत ही अद्भुत है. ये देखने से आपको काफी विचित्र लग सकते है, लेकिन विविधताओ से भरे भारत देश मे कई ऐसे स्थान है जो असामान्य से लगते है. ये ऐसे स्थान है जो यात्रियों को रोमांचित कर देते है और उनकी यात्रा को अविस्मरणीय बना देते है. भारत मे कई ऐसे स्थान है जो किसी रहस्य या पहेली से कम नहीं तो कइयो को यह भी लग सकता है की यह गजब की कारीगरी है. आज हम उन स्थानों के बारे में बतायेंगे जो आपको अचरज मे डाल देंगे.

 

भारत के चमत्कारिक स्थान

 

रामेश्वरम मे तैरते पत्थर floating stones in rameshwram

 

भारत

 

रामेश्वरम एक पवित्र शहर है जो की रामनाथस्वामी मंदिर और यहाँ के तैरते मंदिरों के लिये प्रसिद्ध है. रामेश्वरम के तैरते पत्थर एक रहस्य है, ये तैरते पत्थर तटीय क्षेत्रो के पास पाये जाते है,  इन पत्थरों की भौतिक और रासायनिक संरचना किसी अन्य पत्थर के समान ही हैं.  रामायण की एक कथा मे हमें रामसेतु और तैरते पत्थरों का वर्णन मिलता है, कथा के अनुसार राम ने अपनी वानर सेना के साथ मिलकर श्रीलंका जाने के लिये तैरते पत्थरों का एक सेतु बनाया जिसे आज भी देखा जा सकता है. हालाँकि आधुनिक वैज्ञानिक इससे इंकार करते है लेकिन इन तैरते पत्थरों की पहेली को नहीं सुलझा सके है. ये चमत्कार ही है की 20 किलो के पत्थर पानी मे तैर रहे है. चार से पांच तैरते पत्थरों को जिनका वजन 10 से 20 किलो है उन्हें रामेश्वरम मंदिर मे भी रखा गया है. भारत और विदेशो से कई यात्री रामेश्वरम मे तैरते पत्थरों को देखने के लिये आते है.

 

जयपुर का जलमहल jal mahal of jaipur

भारत

मान सागर लेक के बीच मे बना जलमहल एक ओर मनमोहक, सुंदर और अद्भुत स्थान है. यह महल आमेर के महाराजा जय सिंह द्वितीय ने 18वी शताब्दी मे बनवाया था. झील के पीछे अरावली की पहाड़िया और नाहरगढ़ के पहाड़, सुंदर वास्तुकला, शांत वातावरण इसे आकर्षक बना देते है. इसे रोमांटिक महल और आई बाल के नाम से भी जाना जाता है, नौका में बैठ कर ही इस महल तक जाया जा सकता है. पुराने समय मे राजा यहाँ पिकनिक मनाने और शिकार के लिये आते थे. इस महल के पांच मंजिल थे लेकिन चार मंजिल झील के पानी मे समा गये है. यह आश्चर्य की बात ही है की राजस्थान जैसे राज्य मे जहा का तापमान और गर्मी अधिक रहती है लेकिन इस महल मे गर्मी का अनुभव नहीं होता साथ ही महल से झील और पहाड़ो का भी सुन्दर दृश्य दिखता है. अब यह स्थान जैव विविधता और पक्षी अभ्यारण्य के रूप में भी विकसित हो रहा है, देश और विदेश से कई सैलानी यहाँ यात्रा करने आते है.

 

आंध्रप्रदेश मे वीरभद्र मंदिर का फ्लोटिंग पिल्लर floating pillar of lepakshi temple

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वीरभद्र मंदिर इसे लेपाक्षी मंदिर भी कहा जाता है. इसका निर्माण 16वी शताब्दी में भारत के आंध्रप्रदेश राज्य के अनंतपुर जिले के लेपाक्षी नामक गाँव मे हुआ था. इस मंदिर का निर्माण विरन्ना और विरुपन्ना नामक दो भाइयो ने किया था.  यह मंदिर आश्चर्य और रहस्य के नमूने का एक उदाहरण है, साथ ही अपनी विशाल विविधता पूर्ण वास्तुकला के लिये भी जाना जाता है. यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है और हवा मे झूलता इस मंदिर का एक पिल्लर एक रहस्य बना हुआ है. इस मंदिर में 72 स्तंभ (पिल्लर) है लेकिन इनमे से एक स्तंभ (पिल्लर) ऐसा है जो हवा मे  लटका है. यह चमत्कारी पिल्लर यात्रियों के लिये दर्शन का प्रमुख केंद्र है. इंजीनियर इस फ्लोटिंग पिल्लर की गुत्थी नहीं सुलझा सके है.  मंदिर की छत पर बनाइ गई वीरभद्र की 24 बाय 14 फुट की वाल पेंटिंग भारत की सबसे बड़ी वाल पेंटिंग है. इसके अलावा मंदिर मे नंदी की 27 फुट लंबी और 15 फुट ऊँची मूर्ति भी है जो की दुनिया मे नंदी की सबसे बड़ी मूर्ति है.

 

औरंगाबाद मे बना बीबी का मकबरा bibi ka maqbra

भारत

दोस्तों ताजमहल के बारे मे तो सब जानते है, जी हाँ मै दुनिया के सबसे बड़े अजूबे की बात कर रहा हूँ, आगरा का ताजमहल. लेकिन क्या आप जानते है की मुगल शासक औरंगजेब के पुत्र आजम शाह द्वारा बनाया गया बीबी का मकबरा को ताजमहल की कॉपी कहा जाता है. जी हाँ ताजमहल जैसा दिखने वाला  बीबी का मकबरा आजम शाह ने अपनी मां की याद मे बनाया था. इसे दक्कन का ताजमहल, दक्षिण का ताजमहल और दक्षिण का ताज के नाम से भी जाना जाता है. महाराष्ट्र के औरंगाबाद जिले में स्थित ताजमहल जैसा दिखने वाला यह मकबरे  का डिजाइन अता उल्ला द्वारा बनाया गया था, अता-उल्ला ताजमहल के मुख्य डिजाइनर उस्ताद अहमद लाहौरी का पुत्र था।

 

उत्तरकाशी के शक्ति देवी मंदिर का त्रिशूल trident of shakti devi temple

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उत्तरकाशी के काशी विश्वनाथ मदिर के समिप बने शक्ति देवी मंदिर मे स्थित त्रिशूल अद्भुत है. इस त्रिशूल की खास बात ये है की इसे कोई इंसान अपने शरीर के पूरे बल से इसे हिला भी नहीं सकता  लेकिन केवल एक ऊँगली का स्पर्श कर देने से ये त्रिशूल हिलने लगता है. यह किसी चमत्कार से कम नहीं है. त्रिशूल का उपरी भाग लोहे का और निचला भाग तांबे का बना हुआ है, इस त्रिशूल को शक्ति के रूप मे पूजा जाता है. ये 6 मीटर ऊँचा और भारी त्रिशूल है, इसके पीछे कथा ये है की देवताओ और असुरो के बीच हुए युद्ध मे देवी दुर्गा ने (जिन्हें शक्ति भी कहा जाता है) असुरो पर यह त्रिशूल फेंका था ताकि उनका विनाश किया जा सके.

 

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