मरने के बाद मृत शरीर कितने समय तक रहता है – मानव अपघटन और इसके चरण

ये तो हम जानते है की मरना जीवन का अंतिम सत्य है और मृत्यु से कोई बच नहीं सकता. अलग अलग धर्मो और संस्कृतियों के हिसाब से या तो मृत व्यक्ति को जला दिया जाता है या तो दफना दिया जाता है. लेकिन क्या आप जानते है की अगर मृत शरीर को जलाया या दफनाया ना जाये तो मृत शरीर कितने समय तक रह सकता है, अगर नहीं तो इस पोस्ट को पढने के बाद आपकी जानकारी काफी मजबूत हो जायेगी. पृथ्वी के सभी जीव प्रकृति की अदभुत रचना है और यही प्रकृति जीवो के अंतिम समय पुरे हो जाने पर मृत जीवो के शरीर के कार्य भंग करने मे अच्छी तरह सक्षम है. मानव का शरीर एक मशीन की तरह होता  है, जब मानव मर जाता है तो इस मशीन यानी शरीर के अंग धीरे धीरे कार्य करना बंद कर देते है. जब कोई मानव मर जाता है तो उसका दिल उसके शरीर मे रक्त की पम्पिंग को रोक देता है, जिससे उसकी कोशिकाएं ऑक्सीजन से वंचित हो जाती हैं, जो तेजी से मरने लगती हैं और शरीर का सड़ना गलना (decomposition) लगभग तुरंत शुरू हो जाता है, रक्त के शरीर में घूमना रूक जाने से त्वचा को कई परिवर्तनों से होकर गुजरना पड़ता है और अंतत: शरीर (body) पीला या भस्मवर्ण रंग (ashen colour) का पड़ जाता है. हालाँकि अलग अलग कोशिकाओ की मृत्यु अलग अलग समय पर होती है, उदाहरण के लिये, मस्तिष्क की कोशिकाये कुछ ही मिनटों मे मर जाती है जबकि त्वचा की कोशिकाये 24 घंटे बाद भी जीवित रह सकती है.

 

human decomposition in hindi (मानव अपघटन)

 

मानव अपघटन (human decomposition) मृत्यु के बाद ऊतकों के टूटने से संबंधित एक प्राकृतिक प्रक्रिया है। हालाँकि मानव अपघटन की दर कई कारकों के कारण भिन्न होती है, इनमे मौसम, तापमान, नमी, पीएच (pH) और ऑक्सीजन के स्तर, मृत्यु के कारण, और शरीर की स्थिति जैसे कारण शामिल होते है, सभी मानव शरीर मानव अपघटन के कुछ चरणों का पालन करते हैं, ये चरण है आटोलिसिस (autolysis), ब्लोट (bloat), सक्रिय क्षय (active decay), advanced decay और कंकालकरण स्केलटनाइजेशन (skeletonization)।

 

 

stages of decomposition in hindi अपघटन के चरण

 

प्रारंभिक क्षय (initial decay) जिसे ‘आटोलिसिस’ कहा जाता है – बाहर से लाश ठीक दिखती है, लेकिन आंतरिक रूप से अंग टूट रहे होते हैं. यह समय पहले 24 से 72 घंटे का होता है, इसमे शरीर मे रक्त बहना और शवसन रूक जाता है. शरीर में ऑक्सीजन प्राप्त करने और कचरा हटाने का कोई तरीका नहीं होता, अत्यधिक कार्बन डाइऑक्साइड एक अम्लीय वातावरण का निर्माण करता है, जिससे कोशिकाओं में झिल्ली टूटने लगती है। झिल्ली एंजाइमों को छोड़ते हैं जो कोशिकाओं को खाते हैं। मृत्यु होने के बाद जल्द ही rigor mortis होता  है, जो एक जटिल रासायनिक प्रतिक्रिया (जिसमे लैक्टिक एसिड और मायोसिन शामिल होते है) के कारण होती है, जो जेल की तरह पदार्थ बनाता है जिससे शरीर की कठोरता पैदा होती है।

 

ब्लोट (bloat)

 

दूसरे चरण मे putrefaction होता है. इसमें लगभग दो-तीन दिन के बाद बैक्टीरिया सक्रिय हो जाते है और शरीर में गैसों और साथ में गंध के साथ सूजन आने लगती है. पहले चरण मे निकलने वाले एंजाइम कई गैसों का उत्पादन शुरू करते हैं। गैसों के कारण, मानव शरीर का आकार दोहरा हो सकता हैं। इसके अलावा, कीट गतिविधिया भी मौजूद हो सकती है। सूक्ष्मजीवों और बैक्टीरिया बेहद अप्रिय गंध का उत्पादन करते हैं जिसे putrefaction कहते हैं।

 

 

सक्रिय क्षय (active decay)

 

active decay के दौरान कीड़े और मैग्गोट्स शरीर को खाते हैं और इसे आगे टूटने में मदद करते हैं। त्वचा काली पड़ जाती है अधिकांश तरल शरीर छोड़ देता है । क्षय अवशेष से गंध बहुत ज्यादा होती है। यह चरण मौत के 10 से 25 दिनों मे होता है।

 

 

advanced decay

 

यह चरण 25 से 50 दिनों में होता है, इसमे मैगॉट्स और अन्य कीड़े नरम ऊतकों, त्वचा और बालों के साथ-साथ मांसपेशियों और शरीर के अंदर संयोजी ऊतक (connective tissue) को तोड़ते हैं। शारीरिक संयोग टूट जाता है जो की हड्डियों को पर्यावरण मे उजागर कर देता है और संभवत: उन्हें दूर करने और तितर बितर करने की अनुमति देता है।

 

 

स्केलटनाइजेशन (skeletonization)

 

50 या उससे अधिक दिनो के बाद, लाश एक कंकाल बन जाती है. हड्डिया, दांत, बाल और सूखे त्वचा मौजूद हो सकते है, लेकिन मांसपेशी और संयोजी ऊतक के टूटने के साथ, वे एक पहचान योग्य मानव संरचना में नहीं रहते हैं. क्योंकि कंकाल की अपघटन दर (decomposition rate) जैविक और अजैविक तत्वों के नुकसान पर आधारित होती है इसलिये स्केलटनाइजेशन होने की कोई निर्धारित समय सीमा नहीं होती है.

 

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