जानिये मिस्त्र के पिरामिड क्या है और ये कैसे बनाये जाते थे

आपने पिरामिडो के बारे में तो सुना ही होगा, मिस्त्र के पिरामिड विश्व के सबसे प्रसिद्ध मानव निर्मित संरचनाओ मे से एक है, पिरामिड एक शाही मकबरा था और मृतक फैरो (सम्राट) की आत्मा के लिए चढ़ाई की जगह माना जाता था, प्राचीन मिस्त्र वासियों ने पिरामिड को राजाओं और उनकी रानियों के लिए कब्रों के रूप में बनाया था। प्राचीन साम्राज्य की शुरुआत से पहले और मध्य साम्राज्य के अंत तक फैरो (सम्राट) को कई अलग-अलग आकृतियो और आकारो के पिरामिडो में दफनाया गया था। इन शवो को मम्मी भी कहते है.

 

गीजा के पिरामिड (pyramids of gija in hindi)

 

आज हम प्राचीन मिस्र के 138 पिरामिडो के बारे मे जानते हैं. तीन सबसे बड़े और अच्छी तरह से संरक्षित किये गये पिरामिड गीजा मे बनाये गये थे, ये पिरामिड पुराने साम्राज्य की शुरुआत के समय बनाये गये थे.इन पिरामिडो में से सबसे प्रसिद्ध पिरामिडो का निर्माण फैरो (सम्राट) खुफु के लिये किया गया था. जिसे ग्रेट पिरामिड के रूप मे जाना जाता है.यह  पिरामिड 455 फीट यानि 138 मीटर लंबा है और इसे विश्व के अजूबो मे भी गिना जाता है.

 

 

प्राचीन मिस्त्र वासियो का मानना ​​था कि जब एक राजा की मृत्यु हो जाती है तो वह ओसिरिस (osiris) बन जाता है,  ओसिरिस (osiris) को मृत्यु का राजा माना जाता था.उनका मानना ​​था कि मृतक राजा को अपने कर्तव्यों को पूरा करने के लिए मृतक के राजा ओसिरिस (osiris) के रूप में अपनी  आत्मा जो शरीर के साथ बनी रहती थी, की देखभाल की जानी चाहिये। मिस्त्र वासियो का ये भी मानना था की मृत्यु के बाद फैरो (सम्राट) को सफल होने और जीने के लिये कुछ चीजो की आवश्यकता है, इसलिये वे फैरो के साथ वस्तुओ और  खजाने को भी दफनाते थे.

 

पिरामिडो को कैसे बनाया गया how did they made pyramids in hindi

 

फैरो शासक बनने के साथ ही पिरामिडो का निर्माण प्रारंभ करवा देता था. इन पिरामिडो का निर्माण कैसे किया गया ये अभी भी एक रहस्य बना हुआ है और  पुरातत्त्ववेत्ता कई सालो से इस रहस्य का समाधान करने की कोशिश कर रहे है,  ऐसा माना जाता है की इन्हें बनाने में हजारो दासो का प्रयोग किया गया, वैज्ञानिको ने अनुमान लगाया है की गीजा के पिरामिड का निर्माण करने के लिये करीब 23 सालो मे कम से कम 20 हजार मजदूरो का सहारा लिया गया. इन्हें बनाने मे काफी लंबा समय लगता था, इन्हें धीरे धीरे बनाया गया, एक समय पर केवल एक ही ब्लाक बनाया गया, यह भी माना जाता है की प्राचीन मिस्त्र वासी पत्थरो के विशाल ब्लॉक्स को रेगिस्तान के पार ले जाने में सक्षम थे. एक नयी रिसर्च के मुताबिक गीली रेत के द्वारा भी भारी वस्तुओ को खींचना संभव हुआ. डच शोधकर्ताओ का मानना है की मिस्त्र वासियों ने एक स्लेज (sledge) पर भारी वस्तुएं रखीं और सैकड़ों मजदूरों द्वारा इन्हें खींचा गया, और इसके सामने रेत पर पानी डाला गया होगा। एम्स्टर्डम विश्वविद्यालय मे हुए प्रयोग से ये  बात सामने आई है की रेत मे गीलेपन या नमी की सही मात्रा खींचने पर लगने वाले बल को आधा करती है.

सूखी रेत, स्लेज (sledge) के सामने ढेर हो जाती है, जिससे इसे ले जाना असंभव होता। लेकिन अगर इसे गीली रेत पर सरकाया जाता है तो पानी की सही मात्रा से सूखी रेत कड़ी हो जाती है और स्लेज उसके ऊपर अधिक आसानी से सरकता है।

 

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