दुखी होने से बेहतर है गलती मानना

एक कक्षा में एक छोटी बच्ची उदास बैठी थी. तभी अध्यापक की नज़र उस पर पड़ी और उसने उस बच्ची से पूछा की आखिर तुम इतनी दुखी क्यों हो. बच्ची ने जवाब देते हुए कहा की कल उसने अपने दोस्त की पेंसिल अनजाने में चुरा ली थी, लेकिन अब वह उसे यह वापस करना चाहती है लेकिन वह ऐसा कर नहीं सकती  क्योकि अगर उसने ऐसा किया तो उसकी दोस्त उसे चोर समझेगी और अभी उसकी मदद नहीं करेगी.  इसलिए आज वह उदास और दुखी  है. अध्यापक मुस्कुराते हुए बोली – बस इतनी सी बात? चलो मै बताती हूँ तुम्हे करना क्या है लेकिन उससे पहले तुम सब बच्चे एक कहानी सुनो. तुम्हे अपना जवाब मिल जाएगा.

एक समय  की बात है. एक व्यक्ति था जो बहुत दयालु और उदार था। वह एक ऐसा इंसान था जो किसी को भी बिना ब्याज  के उधार देने में भी कोई संकोच नहीं करता था। साथ ही वह बिना लालच के हर इंसान की मदद किया करता था. एक दिन एक धूल भरी सड़क पर चलते हुए, उस आदमी ने एक पर्स देखा, तो उसने उसे उठा लिया और देखा तो पर्स खाली निकला। तभी अचानक से एक पुलिसवाले के साथ एक महिला आई  और उस आदमी को  गिरफ्तार कर लिया ।

महिला ने आदमी से पूछा कि उसने पर्स के पैसे कहाँ छिपाए है, लेकिन उस आदमी ने हर बार यही जवाब दिया की , “जब मैंने पर्स उठाया , तो यह खाली था।” वह महिला रोने लगी और कहने लगी , “कृपया करके मेरे  पैसे मुझे  वापस दे दो, यह मेरे बेटे की स्कूल की फीस के लिए है।” महिला को दुखी देख उस आदमी को भी बुरा लगा  , इसलिए उसने अपने सारे पैसे उस औरत को सौंप दिए। ।” महिला पैसे लेकर चली गई और पुलिसकर्मी ने आगे की पूछताछ के लिए आदमी को पकड़ लिया।

 

महिला बहुत खुश थी लेकिन जब उसने अपने पैसो की गिनती की, तो उसने देखा की उसके पास  दोगुना पैसे थे, यह देखकर वह चौंक गई.  एक दिन जब वह महिला स्कूल में अपने बेटे की स्कूल की फीस भरने जा रही थी, तो  उसने देखा कि कोई पतला आदमी उसके पीछे चल रहा था। उसने सोचा कि वह उसे लूट सकता है, इसलिए वह पास में खड़े एक पुलिसवाले के पास जाकर खड़ी हो गई. यह वही पुलिसकर्मी था, जिसे वह  अपने साथ बटुए के बारे में पूछताछ करने के लिए ले गई थी. महिला ने पीछा करते हुए आदमी के बारे में  पुलिस वाले को  बताया , लेकिन अचानक उन्होंने देखा कि आदमी गिर रहा है। वे दौड़ कर उसके पास गये और देखा कि वह वही आदमी था जिसे उन्होंने कुछ दिन पहले बटुआ चोरी करने के लिए गिरफ्तार किया था।

 

वह बहुत कमजोर दिख रहा था. उसे देखकर महिला हैरान थी। पुलिसकर्मी ने महिला से कहा, “उसने उस दिन  आपको आपके पैसे वापस नहीं किये बल्कि  उसने आपको अपने  पैसे  दिये थे.  वह चोर नहीं था, लेकिन आपके बेटे की स्कूल की फीस के बारे में सुनकर वह दुखी हो गया  और उसने आपको अपने पैसे दे  दिये. यह सुनकर वह महिला लज्जित और दुखी हो गई और उसने माफ़ी मांगी. साथ ही उसने उस आदमी के पैसे लोटने चाहे लेकिन आदमी ने पैसे लेने से मना कर दिया और कहा – मै चाहता तो उसी समय आपको झुटा साबित कर सकता था लेकिन मैंने ऐसा नहीं किया. क्योकिं मै आपसे आपकी गलती स्वीकारना चाहता था. हम कभी कभी अपने गुस्से और हताशा में ग़लत निर्णय ले लेते है या गलतियां करते हैं। हालांकि, जब हमें दूसरा मौका मिलता है, तो हमें अपनी गलतियों को ठीक कर लेना चाहिये. आज मेरा इंसानियत पर और मजबूत विश्वास हो गया है. आप यह पैसे किसी जरूरतमंद को देना. यह कहकर वह व्यक्ति वहां से चला गया.

 

दोस्तों है तो यह एक कहानी लेकिन इसमें काफी अच्छी शिक्षा छुपी है. हम अक्सर दुसरो की मदद करते है लेकिन जिंदगी में घटे एक नकारात्मक अनुभव की वजह से हमारा विश्वास भलाई और मदद करने की भावना से उठ जाता है. क्योकि हम उस कडवे अनुभव के पीछे की वजह को नहीं देख पाते. इसलिए इंसान को अपने निर्णयों पर भरोसा होना जरुरी है. साथ ही अगर किसी इंसान से भी कोई गलती होती है और उसे उसका पछतावा है तो उसे दूर करने का सबसे अच्छा तरीका है अपनी गलती मान लेना. इससे इंसान गिरता नहीं है बल्कि अपनी नजरो में और ऊँचा उठ जाता है.

 

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