जानिये 2017 छठ पूजा व्रत, पूजन विधि और महत्व के बारे में

छठ पूजा का त्यौहार भारत के पूर्वी राज्यों जैसे बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखण्ड  समेत नेपाल में भी मनाया जाता है.  इस दिन स्त्री और पुरुष व्रत रखते है और अपने परिवार के लिए सुख,समृद्धी और सर्वकामना पूरी होने की प्राथना करते है.  इस पर्व में सूरज देवता की पूजा की जाती है, जब सूर्य उग रहा होता है और ढल रहा होता है उस समय सूरज की आराधना की जाती है. इस पर्व में निर्जला व्रत रखा जाता है.

यह त्यौहार चार दिन का होता है और दिवाली के छठे दिन इस पर्व को मनाया जाता है, जो की हिन्दू कैलेंडर के अनुसार कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी को आता है. इसलिए इसे छठ कहा जाता है. इस पर्व को अन्य नामो से भी जाना जाता है जैसे सूर्य षष्ठी, छठी माई की पूजा, डाला छठ, डाला पूजा,  छठ पूजा, छठ पर्व. इस पर्व की शुरुआत कार्तिक शुक्ल पक्ष चतुर्थी से होती है और कार्तिक शुक्ल पक्ष सप्तमी के दिन इसका समापन किया जाता है.

जानिये छठ पर्व के चार दिनों में क्या क्या होता है

छठ का पर्व चार दिन मनाया जाता है, छठ व्रत 36 घंटे का होता है और इस दौरान व्रत रखने वाले लोग पानी भी नहीं पीते.

पहला दिन – नहाय खाय

कार्तिक शुक्ल पक्ष चतुर्थी के दिन पुरे घर की सफाई की जाती है और उसे पवित्र बनाया जाता है. इसके बाद छठव्रती स्नान करना होता है तत्पश्चात पवित्र तरीके से बनाये गए शाकाहारी भोजन करके व्रत को शुरू करना होता है.

दूसरा दिन – लोहंडा और खरना

कार्तिक शुक्ल पक्ष पंचमी के दिन दिन भर उपवास रखा जाता है और शाम को भोजन करना होता है, जिसे खरना कहते है. खरना आस पास के लोगो को भी बुला कर दिया जाता है. प्रसाद में चावल की खीर, चावल का पिट्ठा और घी चुपड़ी रोटी भी बनायी जाती है. घर को स्वच्छ रखा जाता है.

तीसरे दिन – संध्या अर्ध्य

कार्तिक शुक्ल पक्ष षष्ठी के दिन छठ प्रसाद बनाते है, प्रसाद में ठेकुआ, चावल के लडडू बनते है. इसके अलावा चावल रुपी सांचा और फल भी प्रसाद में शामिल होते है.

शाम के वक्त बाँस की टोकरी में अर्घ्य का सूप सजाया जाता है और व्रत रखने वाले के साथ घर परिवार और आस पड़ोस के लोग अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देने घाट पे जाते है। छठ का व्रत रखने वाले किसी नदी किनारे एकत्रित होते है और मिलकर अर्घ्य दान संपन्न करते हैं। सूर्य को जल और दूध का अर्घ्य दिया जाता है तथा छठी मैया की प्रसाद भरे सूप से पूजा की जाती है, इस दौरान दृश्य काफी मनोरम हो जाता है।

चौथे दिन – परना दिन, उषा अर्ध्य

कार्तिक शुक्ल पक्ष सप्तमी यानी छठ पर्व  के अंतिम  दिन उदयमान सूर्य को अर्ध्य देते है, व्रत रखने वाले वहाँ दोबारा एकत्रित होते है जहाँ उन्होंने पूर्व संध्या पर अर्ध्य दिया था. फिर व्रत रखने वाले वापिस आकर गाँव के पीपल की पूजा करते है. फिर वे कच्चे दूध का शरबत पीकर और थोडा प्रसाद खा के व्रत को पूरा करते है जिसे परना कहा जाता है.

 

छठ पूजा का महत्व

छठ पूजा का सामाजिक, सांस्कृतिक और पौराणिक महत्व है. यह पर्व सादगी, साफ स्वच्छता और पवित्रता का प्रतीक है.  छठ व्रत रखकर जीवन में सुख और वैभव की प्राप्ति होती है. इस त्यौहार में सामाजिक एकता, भक्ति भाव और शांति भाव देखने को मिलता है. इस त्यौहार में लोग छठ गीत और भक्ति  से पूर्ण लोकगीत गाते है और साफ सफाई से छठ का प्रसाद बनाया जाता है.

2017 मे छठ पूजा कब मनायी जायेगी

दीपावली के छ: दिन बाद यानी 24 अक्टूबर,2017 मंगलवार के दिन छठ पर्व मनाया जायेगा.

 

गजब बात के सभी पाठको को छठ पर्व की हार्दिक शुभकामनाये

 

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