श्रीमद्भगवदगीता के अनमोल विचार bhagwad gita quotes in hindi

श्रीमद्भगवदगीता का नाम सुनते है लोग इसे धर्म के साथ जोड़कर देखते है इसलिए आजकल की generation इसके महत्व को नजरअंदाज कर देती है. लेकिन क्या सच में गीता सिर्फ एक धार्मिक किताब ही है? बिलकुल भी नहीं. महाभारत के युद्ध की शुरुआत में जब अर्जुन चिंता और सदेह  से घिर जाते है तब भगवान् कृष्ण अर्जुन को उपदेश देते है जिसे गीता के नाम से जाना जाता है. यानी आज के समय के शब्दों में कहे तो कृष्ण अर्जुन की काउन्सलिंग करते है.

गीता सिर्फ एक धार्मिक किताब नहीं बल्कि एक सही दिशा है जो इंसान को गलत रास्तो पर भटकने से रोकती है.  यह इंसान को अपने आप से परचित करवाती है. आज हर इंसान अपने आप से नहीं बल्कि दुसरो से रेस लगाने में लगा है बिना यह जाने की आखिर उसे जाना कहा है. जब तक वह समझ पाता है तब तक स्ट्रेस , चिंता, अकेलापन और टूटते रिश्ते उसे चारो तरफ से घेर लेते है. यदि सही समय पर व्यक्ति को मार्गदर्शन मिल जाये तो काफी हद वह अपने आप को इनसे बचा सकता है.

तो दोस्तों आज हम आपके साथ  भगवत गीता के कुछ quotes शेयर करने जा रहे है. उम्मीद करते है की यह आपके लिए लाभदायक सिद्ध होंगे.

 

गीता के अनमोल वचन bhagwad gita quotes in hindi

 

परिवर्तन परिवर्तन ही संसार का नियम है. एक पल में हम करोड़ों के मालिक हो जाते है और दुसरे पल ही हमें लगता लगता है की हमारे आप कुछ भी नहीं है.

 

 

इंसान का मन अशांत रहता है और इसे नियंत्रित करना कठिन है, लेकिन अभ्यास और ध्यान से इसे वश में किया जा सकता है.

 

 

अपने आपको भगवान् के प्रति समर्पित कर दो. यही सबसे बड़ा सहारा है. जो कोई भी इस सहारे को पहचान गया है वह डर, चिंता और दुखो से आजाद रहता है.

 

 

तुम क्यों व्यर्थ में चिंता करते है? तुम क्यों भयभीत होते हो? कौन तुम्हे मार सकता है? आत्मा न कभी जन्म लेती है और न ही इसे कोई मार सकता है.

 

 

तुम्हारे पास अपना क्या है जिसे तुम खो दोगे? तुम क्या अपने साथ लाये थे? हर कोई खाली हाथ आया है और खाली हाथ जाएगा.

 

 

न तो यह शरीर तुम्हारा है और न तो तुम इस शरीर के मालिक हो. यह शरीर 5 तत्वों से बना है – आग, जल, वायु पृथ्वी और आकाश. एक दिन यह शरीर इन्ही 5 तत्वों में विलीन हो जाएगा.

 

 

इंसान जन्म से नहीं बल्कि अपने कर्मो से महान बनता है.

 

 

“पूर्णता के साथ किसी और के जीवन की नकल कर जीने की तुलना में अपने आप को पहचानकर अपूर्ण रूप से जीना  बेहतर है।”

 

 

“नरक के तीन द्वार हैं: वासना, क्रोध और लालच।”

 

 

समय से पहले और भाग्य से अधिक किसी को कुछ नहीं मिलता.

 

 

इंसान अपने विश्वास से निर्मित होता है. जिस प्रकार वह विश्वास करता है उसी प्रकार वह बन जाता है.

 

 

जो इंसान ज्ञान और कर्म को एक सामान देखता है, सिर्फ उसी व्यक्ति का नजरिया सही है.’

 

 

हमेशा संदेह करने से खुद का ही नुकसान होता है. संदेह करने वाले व्यक्ति के लिए प्रसन्नता न ही इस लोक में है और न ही किसी और लोक में.

 

 

जो व्यक्ति अपने मन को नियंत्रित में नहीं करता उनके लिए वह शत्रु के सामान कार्य करता है.

 

 

जब इंसान बेकार की इच्छाओ के त्याग कर देता है और मै और मेरा की लालसा से मुक्त हो जाता है तब ही उसे शांति मिल सकती है.

 

 

जब इंसान अपने काम में आनंद खोज लेते हैं तब वे पूर्णता प्राप्त करते हैं.

 

 

अच्छे कर्म करने के बावजूद भी लोग केवल आपकी बुराइयाँ ही याद रखेंगे. इसलिए लोग क्या कहते है इस पर ध्यान मत दो. अपने कार्य करते रहो.

 

 

गुस्से से भ्रम पैदा होता है. भ्रम से बुद्धि व्याकुल हो जाती है. जब बुद्धि व्याकुल होती है तब इंसान में तर्क नष्ट हो जाते है. जब तर्क नष्ट होता है तब इंसान का पतन हो जाता है.’

 

 

दोस्तों उम्मीद करते है आपको श्रीमद्भगवदगीता के यह चुनिंदा quotes पसंद आये होंगे. कृपया इन्हें शेयर करे और अगर आप भी हमारे आने वाले सभी आर्टिकल्स सीधे अपने मेल में पाना चाहते है तो हमें फ्री सब्सक्राइब जरुर करें.

 

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