तो इसलिए खाने को 32 बार चबाना चाहिए

आपने एक कहावत तो सुनी ही होगी की हमें खाने को 32 बार चबाना चाहिए. ये बात हमें अक्सर अपने घर में या टीचर्स द्वारा सुनने को मिलती है. अलग अलग लोग इसके पीछे अलग अलग कारण बताते है. कई लोगो का मानना है की खाने को अच्छी तरह चबाने से खाना अच्छी तरह से पच जाता है तो कई लोगो का मानना है की इससे हमारा वजन भी कंट्रोल में रहता है. लेकिन क्या सच में खाने को अच्छी तरह से चबाने/ chewing से फायदा होता है या ये सिर्फ एक धारणा है? क्या इसके पीछे कोई साइंटिफिक कारण है? तो दोस्तों आइये जानते है की ऐसा क्यों कहा जाता है.

 

Benefits of chewing food properly in hindi – खाने को अच्छी तरह से चबा कर खाने के फायदे

 

एक्सपर्ट्स के अनुसार जब हम खाने को अच्छी तरह से चबाते है तो खाना छोटे छोटे टुकड़ों में बंटकर Saliva/लार के साथ मिलकर तरल प्रदार्थ में बदल जाता है जिससे शरीर खाने के पोषक तत्वों को अच्छे से अवशोषित कर लेता है.

खाना चबाने/chewing के दौरान हमारे चेहरे की trigeminal nerve  के माध्यम से ब्रेन  को यह संदेश मिलता है कि पेट को अब एसिड का स्त्राव शुरू कर देना चाहिए। खाना धीरे धीरे खाने से शरीर को लेप्टिन, ग्रेलिन जैसे हार्मोन के स्त्राव के लिए समय मिल जाता है जिनका पाचन क्रिया में महत्वपूर्ण योगदान है.

जो लोग अपना वजन maintain रखना चाहते है उनके लिए भी खाने को धीरे धीरे चबाना फायदेमंद है. क्योकि खाना खाने के दौरान ‌हमारा दिमाग शरीर को पेट भरने के संकेत देता है. और इस प्रक्रिया में लगभग 20 – 25 मिनट तक का समय लगता है. इसलिए जल्दी जल्दी खाना खाने से हम कई बार ज्यादा खा लेते है जिससे वजन बढ़ जाता है.

विशेषज्ञों का मानना है की भोजन को अच्छे से चबाने/ chewing के दौरान मुहं में लार का स्त्राव अधिक मात्रा  में होता है जिससे भोजन के कण दाँतों के बीच नहीं फसते. इससे बैक्टीरिया से बचाव होता है और मुहं में दुर्गन्ध नहीं आती.

 

 

Why chewing food 32 times in hindi – खाने को 32 बार क्यों चबाना चाहिए.

 

कई लोगो के मन में सवाल आता है की, 32 बार ही क्यों खाने को चबाना चाहिए ? इससे कम या ज्यादा क्यों नहीं ?  क्योकि 32 बार खाना चबाने की संख्या अमेरिका के आहार विशेषज्ञ होरेस फ्लेचर नामक व्यक्ति ने दी थी  । उनके अनुसार 32 बार चबाना हमारे 32 दांतों से जुड़ा हुआ है.  32 बार चबाने से भोजन पूरी तरह से टूट कर saliva में घुल जाता है जो आसानी से पच जाता है.

तब से यह धारणा विख्यात हो गई और अच्छे से चबाने के समानार्थक शब्द के रूप में इसे प्रयोग किया जाने लगा.

 

तो दोस्तों अब तो आप समझ ही गये होंगे की क्यों बचपन में आपके पेरेंट्स आपको टीवी न देखते हुए खाने की सलाह देते थे.

 

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