जानिए कैसे हुआ राजनीति में लेफ्ट और राईट विचारधारा का जन्म

आपने अक्सर अखबारों और न्यूज़ चैनल पर लेफ़्ट और राइट विचारधारा जैसे शब्दों के बारे में सुना होगा. आम लोग ऐसे राजनीतिक शब्दों को समझ नहीं पाते और उलझ जाते है. असल में राजनीति जितना पैचिदा दिखती है उतनी है नही, बस जरूरत है तो इसे गौर से समझने की. राजनीति में लेफ्ट राईट क्या है ये बताने से पहले इस बात का जानना जरूरी है की भारतीय संसद में सत्ता पक्ष के सांसद अध्यक्ष दाई तरफ बैठते है और विपक्ष के सांसद बाई तरफ बैठते है.  तो दोस्तों आज इस पोस्ट में हम इस सवाल का जवाब देने की कोशिश करेंगे

 

राजनीति में लेफ्ट और राईट विचारधारा का जन्म कैसे हुआ – The origins of the terms left and right-wing in hindi

 

इस संरचना को काफी हद तक फ़्रांस की क्रांति से जोड़ा जा सकता है क्योकि फ़्रांस की क्रांति आधुनिक लोकतंत्र की शुरुवात माना जाता है.

सत्ता पक्ष का अध्यक्ष के दाई तरफ और विपक्ष का बाई तरफ होने की शुरवात 1779 में हुई थी जब फ़्रांस की राष्ट्रीय सभा दो गुटों में बट गई. एक गुट लोकतान्त्रिक सरकार चाहता था और दूसरा गुट राजशाही यानी राजाओ की सरकार चाहता था. तब वहा के तत्कालीन सम्राट लुइ-16 ने राष्ट्रीय सभा बुलाई और कहा की जो लोग राजा के साथ है वो लोग सम्राट के दाई तरफ आ जाए और जो लोग सम्राट का समर्थन नही करते वो लोग बाई तरफ आ जाए. उस समय फ़्रांस की राष्ट्रीय सभा में सम्राट के  दाई तरफ बैठने वाले लोगो  में कारोबारी, कुलीन वर्ग और धार्मिक मान्यताओ का पालन करने वाले व्यक्ति थे और सम्राट के बाई तरफ ज्यादातर  लोग आम नागरिक और गरीब वर्ग के लोग थे. सम्राट के दाई तरफ वाले लोगो को दक्षिण पंथी कहा गया. ये लोग अपने कारोबार और अपनी सम्पति को बचाए रखना चाहते थे. वही बाई तरफ वाम पंथी लोग जो समानता और नागिरक अधिकारों की बात कर रहे थे. तो इस तरह दक्षिणपंथियो को पूंजीवादी और वामपंथियों को समाजवादी माना गया.

धीरे धीरे ये संरचना और विचारधाराए फ़्रांस से निकल कर दुसरे देशो में पहुची. हालाकिं  हर देश में इसे अलग अलग तरीके से अपनाया गया. और 1848 में काल मार्क्स और फ्रेडरिक एंजेल्स ने कम्युनिस्ट मैनिफेस्टो लिखा जिससे वामपंथी विचारधारा लोगो के लिए और स्पष्ट हो गई. इस तरह लेफ्टिस्ट, वामपंथी विचारधारा कम्युनिस्ट विचारधारा  भी कहलाई जाने लगी.

 

आगे चल कर लेफ्ट और राईट  विचारधाराओ पर  किये गए जिनके कई अलग अलग नतीजे आये लेकिन इन दोनों विचारधाराओ के बीच बहस आज भी जारी है.

 

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