लीप वर्ष क्या है, इसके नियम और शताब्दी लीप वर्ष क्यों नहीं होता

आपने लीप वर्ष के बारे में सुना होगा, 29 फरवरी का दिन जिसे लीप दिन माना जाता है, वैसे फरवरी महीने में 28 दिन होते है लेकिन लीप वर्ष में फरवरी माह में 29 दिन होते है. लेकिन लीप वर्ष क्या है और किन नियमो के आधार पर इसका निर्धारण किया जाता है, शताब्दी वर्ष लीप साल क्यों नहीं होता ऐसे ही कुछ प्रश्नों के जवाब हम इस पोस्ट में जानेंगे.

 

लीप वर्ष क्या होता है what is leap year in hindi

लीप साल में 366 दिन होते है जबकि वैसे हर साल में 365 दिन होते है,  हर चौथा साल ऐसा साल होता है जिसमे साल के दिनों में  एक दिन बढ़ जाता है. जिस साल में 366 दिन होते है उसे लीप वर्ष कहते है. मुख्य रूप से लीप वर्ष में फरवरी महीने में 29 दिन होते है जबकि दूसरे सालो में फरवरी केवल 28 दिन की होती है.

 

लीप दिन हर चार साल में एक बार आता है क्योकि पृथ्वी सूरज के चारो ओर चक्कर लगाने में 365 दिन और 6 घंटे लेती है, वैसे साल 365 दिनों का होता है और ये अतिरिक्त 6 घंटे हर चौथे साल में जुड़कर एक पूरा दिन बना देता है. इसलिए लीप दिन या लीप साल हर चौथे साल आता है.

 

अगला लीप साल या लीप दिन कब आयेगा

पिछला लीप साल और दिन 29 फरवरी 2016 में आया था और अगला लीप वर्ष 29 फरवरी 2020 में आयेगा.

 

लीप वर्ष के नियम leap year rules in hindi

कैसे पता किया जाता है कोई वर्ष लीप वर्ष है या नहीं, किसी वर्ष को लीप वर्ष होने के लिए उसे दो बातो को पूरा करना होता है,

पहली बात साल को चार से भाग किया जा सकता हो जैसे वर्ष 2008 को 4 से भाग किया जा सकता है. इसी प्रकार 2012, 2016, 2020 भी चार से भाज्य है.

दूसरी बात यदि कोई वर्ष 100 से विभाजित हो जाए तो वो लीप वर्ष नहीं है, लेकिन यदि वही साल पूरी तरह से 400 से विभाजित हो जाये तो वो लीप वर्ष है जैसे 1300 सौ से तो विभाजित हो जाता है लेकिन चार सौ से पूरी तरह से विभाजित नहीं है लेकिन 2000 सौ से विभाजित होता है लेकिन यह 400 से पूरी तरह से विभाजित होता है अत: यह लीप वर्ष है.

 

लीप वर्ष में 366 दिन क्यों होते है why leap year have 366 days in hindi

लीप साल में 366 दिन इसलिये होते है क्योकि  विश्व में जोर्जियन कैलेंडर का पालन किया जाता है और इसके सही तरीके से कामकाज को बनाये रखने के लिए हर साल में एक दिन जोड़ना आवश्यक होता है. अगर हम हर चौथे साल लीप साल नहीं जोड़ेंगे तो हम प्रकृति के कैलेंडर से हर साल 6 घंटे आगे निकल जायेंगे और अगर ऐसा होगा तो हम मौसम को महीने से जोड़कर नहीं देख पायेंगे यानी की आज जो गर्मी मई और जून के महीने में देखी जाती है वह अगले 500 सालो बाद दिसंबर के महीने में आयेगी.

 

शताब्दी लीप वर्ष क्यों नहीं होती

गिग्लियो ने 16वी सदी मे ये सिद्ध किया कि यदि प्रकृति की घड़ी के साथ साथ चलना है तो हर चौथे वर्ष एक दिन जोड़ने की व्यवस्था में कुछ अपवाद रखने होंगे. उसने कहा कि कोई वर्ष जो कि 4 से विभाजित होता हो, तो वह साल लीप साल होगा जिसमे फरवरी 29 दिन का होगा. लेकिन यदि 4 से विभाजित साल 100 से भी विभाजित होता है तो वह लीप वर्ष नहीं होगा. इसके साथ गिग्लियो ने एक ओर बताई कि 4 और 100 से विभाजित होने वाला वर्ष यदि 400 से भी विभाजित होता हो तो उसे लीप वर्ष माना जाए. इसीलिए 1700, 1800 और 1900 जहाँ सामान्य वर्ष माना गया, वहीं 2000 को लीप वर्ष माना जाता है.

शताब्दी साल लीप वर्ष नहीं होते क्योकि हर चार सालो में एक दिन जोड़कर हम सौ साल के काल में काफी ज्यादा जोड़ देते है क्योकि वास्तव में पृथ्वी सूर्य की प्रक्रिमा 365 दिन, 5 घंटे, 48 मिनट और 45 सेकंड में पूरी करता है. तो जब हर चार साल में एक दिन जोड़ा जाता है तब हम एक छोटे से अंतर से अधिक सही संशोधन करते है. इसलिए हर सौवे साल पर हम एक दिन साल में से हटा देते है. इसी कारण शताब्दी साल जैसे 1700, 1800, 1900, 2100 आदि शताब्दी साल लीप साल नहीं माने जाते.

तो इस प्रकार आप जान ही गए होंगे की लीप साल हर चार साल में एक बार आता है, लेकिन जरा सोचिये की अगर किसी का जन्म लीप दिन पर हो जाये तो.  हालाँकि इसकी संभावना बहुत कम होती है की कोई लीप दिन पर पैदा हो जाये.

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