जानिये पोरस और उनके बहादुरी के किस्सों के बारे में

king porus और alexander के बीच हुये युद्ध की कहानी इतिहास मे काफी प्रसिद्ध है। ग्रीक इतिहास में न केवल सिकंदर की बहादुरी बल्कि पोरस की बहादुरी का भी उल्लेख मिलता है। अपने शासनकाल में  जब सिकंदर  अपने शिखर पर था तब उसने भारत  पर चढ़ाई का फैसला लिया ताकि वह अपने राज्य को सिंधु नदी के पार भी स्थापित कर सके। लेकिन, सिंधु घाटी की सीमा पर, उसे एक बहादुर राजा पोरस का सामना करना पड़ा,   सिकंदर  और राजा पुरु  के बीच युद्ध हुआ और पोरस युद्ध हार गए लेकिन पोरस की बहादुरी से सिकंदर बहुत प्रभावित हुआ था.  कहा जाता  है कि मैसेडोनियन सेना ने राजा पोरस की सेना से लड़ने के बाद आगे बढ़ने से मना कर दिया, यह  सबसे कठिन लड़ाईयो में से एक थी और इसने महान सिकंदर  की सेना के बीच उत्साह को झकझोर कर रख  दिया  । इसका परिणाम यह हुआ की, सेना ने विद्रोह कर  दिया और सिकंदर को अपने देश लौटने के लिए कहा.

 

विश्वभर के इतिहासकारों का मानना ​​है कि मैसोडोनियन पोरस के साथ लड़ाई के बाद यह महसूस करने लगे थे कि वे असाधारण वीरता के लोगों के साथ युद्ध कर रहे थे। उन्हें एहसास हुआ कि वे हार सकते हैं और इसलिए उन्होंने एक संघर्ष विराम के लिए बुलाया, जो कि राजा पोरस ने स्वीकार किया। पौरव राजा ने अलेक्जेंडर के साथ एक सौदेबाजी की ताकि अंभी(तक्षशिला  के  राजा) के क्षेत्र उन्हें वापिस मिल जाये,   जिससे वह अपनी सीमाओं को सुरक्षित कर पाये.

 

 

पोरस कौन था और कहा का राजा था (who was  porus in hindi)

राजा  पुरु  के  इतिहास की बात करे तो   वह पौरवो का राजा था, उनका   क्षेत्र  झेलम (हाईडस्पेश)और चिनाब (एसेसिनास)  नदियों के बीच फैला था। पौरवो की उत्पत्ति बहुत प्राचीन है और पूर्व महाभारत युग की भी मानी जाती है. ऐसे  राजा जो  चन्द्र  के वंशज थे  उन्हें चंद्रवंशी कहा जाता था, ययाति एक ऐसा ही चंद्रवंशी राजा था। उनके दो पुत्र थे – पूरू और यदु। पौरव पूरू के वंशज थे, यादव यदु के वंशज थे। राजा पोरस इन्ही चंद्रवंशी राजा ययति के वंशज थे, चंद्रवंशी होने के नाते, उनकी वीरता, साहस और शक्ति अतुलनीय थी।

 

 

पोरस ने 326 ईसा पूर्व में सिकंदर के साथ हाइडस्पेश की लड़ाई लड़ी। उन्होंने युद्ध में कई तीरो  और घावों का सामना किया था और अपने बेटों को खो दिया था, अलेक्जेंडर से पराजित होने के बाद पोरस के साथ एक प्रसिद्ध मुलाकात में, अलेक्जेंडर ने कथित तौर पर उससे पूछा, “उससे कैसे व्यवहार करना चाहिए “। पोरस ने उत्तर दिया, “जिस तरह से एक राजा दूसरे के साथ व्यवहार करता है” सिकंदर महान राजा पोरस की बहादुर प्रतिक्रिया से बहुत प्रभावित हुआ था कि उसने अपने कब्जे वाले राज्य को वापिस उसे दे दिया. इसके अलावा, उन्होंने उसे तक्षशिला के राजा अंभी के क्षेत्र भी दिये जो अलेक्जेंडर की सेना के साथ लड़े थे।

 

हालांकि, कई इतिहासकार यह मानते है की   यह घटना अनुचित  प्रतीत होती है, क्योंकि तक्षशिला का राजा केवल एक शर्त पर सिकंदर का सहयोगी बन गया था कि वह उसे राजा  पुरु का संपूर्ण राज्य देगा। तो फिर अलेक्जेंडर दुश्मन को पुरस्कृत क्यों करेगा?

 

जानिये हाइडस्पेश की लड़ाई मे क्या हुआ था

पोरस  की  मौत  कैसे हुई (how porus died)

ग्रीक ग्रंथों के अनुसार, अलेक्जेंडर के मरने के बाद अलेक्जेंडर के जनरलों में से एक, युदोमोस,  ने 321 और 315 ईसा पूर्व के बीच उनकी  हत्या कर  दि  । भारतीय इतिहास में इसका कोई रिकॉर्ड नहीं होने के कारण, इसे  ही वास्तविकता के रूप में माना जाता है

 

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