गणेश भगवान को एकदंत क्यों कहा जाता है

हिन्दुओ में जब भी पूजा प्रारंभ होती है, तो उसकी शुरुआत गणेश भगवान की पूजा से की जाती है, उन्हें एकदंत भी कहा जाता है, लेकिन क्या आप जानते है क्यो गणेश को एकदंत कहा जाता है? क्यो गणपति जी की मूर्ति में एक ही दांत लगा रहता है और दूसरा टुटा रहता है? एकदांत भगवान गणेश का एक रूप है, इस रूप मे गणपति जी को एक ही दांत मे दिखाया जाता है. गणपति के इस रूप का उल्लेख हमें मुद्गल पूराण में मिलता है. एकदंत’ का मतलब है ‘एक दांत’। यह माना जाता है कि भगवान गणपति के 32 रूप है और 22वा रूप एकदंत का हैं। भगवान ने अहंकारी दानव मदासुर को नष्ट करने के लिए यह रूप लिया. हालाँकि इस से संबंधित कई कथाये प्रचलित है इस पोस्ट मे हम इसी से संबंधित कुछ कथाओ के बारे में आपको बतायेंगे जिसके कारण गणेश जी का नाम एकदंत पढ़ गया.

 

गणेश एकदंत कथाये ganesh ekdant stories in hindi

 

पद्म पुराण के अनुसार, एक बार भगवान शिव के प्रतापी भक्त, परशुराम कैलाश में उनसे मिलने गये। चूंकि, भगवान शिव ध्यान में व्यस्त थे, गणपति ने परशुराम को निवास में प्रवेश करने से रोका। परशुराम हिंदू पौराणिक कथाओं में अपने क्रोध के लिए जाने जाते थे। जब भगवान गणेश ने उन्हे द्वार पर रोका तो परशुराम क्रोधित हो गये और अपनी कुल्हाड़ी से भगवान पर हमला कर दिया। कुल्हाड़ी को देखकर, भगवान गणेश ने महसूस किया कि यह भगवान शिव द्वारा परशुराम को भेंट किया गया था। इसलिए, उन्होंने कुल्हाड़ी के हमले को नही रोका और उसे अपना एक दांत तोड़ने की अनुमति दी। इस प्रकार, गणपति को एकदंत के रूप में जाना जाने लगा। बाद में परशुराम ने अपनी गलती को महसूस किया और भगवान शिव, देवी पार्वती और गणपति से माफी मांगी।

 

एक अन्य कथा के अनुसार एक बार भगवान गणेश एक भोज से लौट रहे थे, जहां उन्होंने बड़ी संख्या में लड्डू और मोदक का सेवन किया था। जब वह अपनी सवारी मूषक के संग अपने पर्वत पर लौट रहे थे, तब एक सांप उनके रास्ते में आ गया। सांप को देखकर मुषक ने  गणपति को गिरा दिया और भाग गया. जिसका परिणाम यह हुआ की, गणेश जी का पेट फट गया और सभी मिठाई निकल पड़ीं। लेकिन गणेश ने सभी मिठाइयों को इकट्ठा किया और उन्हें अपने पेट में वापस ला दिया। फिर उसने अपने पेट के चारों ओर सांप को एक साथ पकड़ कर रखा। इस घटना को देखते हुए, चंद्रमा हँसने लगे. चंद्रमा को हंसते हुए देखकर गणपति गुस्से मे आ गये। इसलिए, उन्होने अपने दांतों में से एक को तोड़ दिया और इसे चंद्रमा पर फेंका और उसे शाप दिया कि चाँद अपनी पूरी तरह से कभी चमक नहीं पाएगा। बाद में चंद्रमा ने माफी मांग ली और भगवान गणेश ने चाँद से शाप हटा दिया। इस कारण गणेश एकदंत के रूप में जाना जाने लगे। इस घटना के कारण भी लोग गणेश चतुर्थी की रात चंद्रमा को देखने से बचते हैं।

 

एकदंत से संबंधित यह कथा इस प्रकार है कि भगवान गणेश ने महाकाव्य महाभारत को लिखने के लिए एक कलम के रूप में अपने दांतो में से एक का इस्तेमाल किया था. यह कार्य उन्होने वेद व्यास के लिए एक लेखक के रूप में किया.

मदासुर का अंत

यह कथा बताती है की मदासुर नामक दानव के अत्याचारों से सभी देवी देवता परेशान थे, गणपति ने मदासुर का अंत करने के लिए यह अवतार लिया.

 

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