कैसे मिला भगवान विष्णु को सुदर्शन चक्र

सुदर्शन चक्र विष्णु भगवान का एक प्रमुख शस्त्र  है और इस चक्र से उन्होंने कई दानवों का नाश कर दिया, भगवान विष्णु से यह चक्र उनके अवतार श्रीकृष्ण को भी मिला. लेकिन क्या आप जानते है की आखिर भगवान विष्णु को सुदर्शन चक्र कैसे प्राप्त हुआ.  इस लेख में हम आपको बतायेंगे की उनके चक्र का निर्माण कैसे हुआ और विष्णु जी को कैसे हासिल हुआ ये सुदर्शन चक्र, इस संबंध में हमे जानकारी पौराणिक कथाओ से मिलती है.

 

भगवान विष्णु को सुदर्शन प्राप्ति की कथा sudarshana chakra story in hindi

 

पुराणों के अनुसार असुर बहुत बुरे व्यक्तित्व के  थे। वे हमेशा देवताओं पर अत्याचार करते थे, एक बार, देवता राक्षसों के आक्रमणों से इतना दुखी हो गये कि वे मदद के लिये भगवान विष्णु के पास पहुच गये और उनसे राक्षसों को हराने में उनकी मदद करने को कहा।विष्णुजी ने देवताओ से कहा की, “राक्षसों को हराने या नष्ट करने की उनके पास पर्याप्त शक्ति नहीं है। उन्हे शिव से मदद चाहिए, वे शिवजी से एक विशेष हथियार देने के लिए कहेंगे जो कि राक्षसों को पराजित करने में उनकी मदद करे।

 

जब विष्णुजी शिव के पास गये, तो उन्होंने भगवान शिव को ध्यान में पाया। विष्णु शिव के ध्यान मे विघ्न नहीं डालना चाहते थे, इसलिए उन्होंने इस उम्मीद से शिव की प्रार्थना करन शुरू कर दिया कि एक दिन वह अपने ध्यान से बाहर आ जायेंगे. विष्णु ने कई सालो तक शिव की तपस्या की, उन्होंने हर दिन शिव की विधिपूर्वक आराधना और स्तुति की.वे हर दिन शिव भगवान को एक हजार कमल के फूल चढ़ाया करते थे. फूल चढाते वक्त वह शिव का नाम भी जपते थे. अंतत: शिव तपस्या से बाहर आये, विष्णु भगवान को वरदान प्रदान करने से पहले उन्होंने ये निर्णय किया की वे उनकी परीक्षा लेंगे. विष्णुजी शिवजी को हजार कमल के फूल चढ़ाया करते थे, शिव उस स्थान पर गये और अपनी माया से एक फूल वहां से गायब कर दिया, जब विष्णु ने सभी फूल शिव जी को अर्पित कर दिये और उनमे से एक फूल बच गया, विष्णुजी उसे खोजने लगे जब वह नहीं मिला तो उन्होंने अपना एक नेत्र निकाल कर शिव जी को अर्पित किया.

 

अपने प्रति विष्णुजी की इस भक्ति को देख शिव प्रसन्न हो गये और उनसे कहा की वो उनसे जो कुछ मांगेंगे वे उन्हें दे देंगे. विष्णु ने शिव से कहा की, मुझे ऐसा अस्त्र प्रदान करे जिससे वे असुरो पर विजय पा सके. शिव जी ने उन्हें शत्रुओ पर विजय प्राप्त करने के लिये सुदर्शन चक्र प्रदान किया. विष्णु ने इस चक्र से असुरो को पराजित कर देवताओ को असुरो के अत्याचारों से मुक्त कराया और सुदर्शन चक्र विष्णुजी के साथ सदा के लिये जुड़ गया. जब विष्णु भगवान ने अवतार लिया तो विष्णु जी ने यह सुदर्शन चक्र श्रीकृष्ण को प्रदान कर दिया. श्री कृष्ण ने भी सुदर्शन चक्र का इस्तेमाल अधर्म को मिटाने और धर्म कि स्थापना के लिये किया.

 

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